इस दिवाली,हिंदुस्तान की दिवाली, चीन का दिवाला…इसे कहते हैं ‘मोदी मैजिक’ !


हिंदुस्तान में इस बार की दिवाली बेहद खास है, क्योंकि इस बार चीन के प्रोडक्ट्स का इस तरह से विरोध हुआ है कि ड्रैगन का बिजनेस बर्बाद हो चला है।

New Delhi,Oct 24 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जबसे मेक इन इंडिया कैंपेन चलाया है, उसका असर पूरे हिंदुस्तान में देखने को मिल रहा है। इस बार भारत के मार्केट से चीन का माल पूरी तरह से गायब दिख रहा है। लोग किसी भी हाल में चीनी प्रोडक्ट्स को खरीदना नहीं चाहते। आपको बता दें कि पूरे देश में चीन के प्रोडक्ट्स का जबरदस्त विरोध चल रहा है। कहीं चीनी सामान की होली जलाई जा रही है तो कहीं चीन के सामानों के विरोध में कैम्पेनिंग की जा रही है। यानी कुल मिलाकर चीन का बिजनेस भारत ने बुरी तरह से बर्बाद कर डाला है। इस बीच भारत के बाजारों में दिवाली से पहले देखा जा रहा है कि देश में बने पटाखों, मूर्तियों और लाइट्स की डिमांड काफी बढ़ती जा रही है। इस बीच बताया जा रहा है चीन को इससे अरबों रुपये का नुकसान हो गया है।

चीनी पटाखों पर बैन का असर इस कदर हो रहा है कि भारत में निर्मित पटाखों की डिमांड लगातार बढ़ती ही जा रही है। इसके अलावा हमने आपको पहले भी बताया था कि किस तरह से चीन की मूर्तियों और गॉड सिंबल का भारत में विरोध हो रहा है। इस बात से भी चीन को जबरदस्त नुकसान हुआ है। अब भारत में घरेलू लघुउद्योग को जबरदस्त प्रॉफिट होता दिख रहा है। घरेलू मैन्‍यूफैक्‍चरर अलग-अलग तरीके के पटाखों के जरिए ग्राहकों के अपनी तरफ खींच रहे हैं। बताया जा रहा है कि चीनी प्रोडक्ट्स का विरोध करने से घरेलू पटाखा कारोबार को इस दिवाली 6000 करोड़ की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि इस बार घरेलू पटाखा कारोबार पिछली बार के सारे रिकॉर्ड्स तोड़ देगा। इससे घरेलू पटाखा बनाने वालों में भी उम्मीद की लौ जल उठी है।

दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश और हरियाणा, ये ऐसे राज्य हैं जहां चीनी सामान का विरोध सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। इन राज्यों में देश में निर्मित पटाखे और फायरशॉट की जबरदस्त डिमांड देखी जा रही है। इस बीच कुछ राज्यों में पटाखों की कीमतों में 10 फीसदी तक भी इजाफा कर दिया गया है लेकिन इससे ग्राहकों को कोई परेशानी नहीं हो रही है। ग्राहक लगातार घरेलू पटाखों की तरफ खिंचे चले जा रहे हैं। इससे पटाखा उद्योग को नई जान भी मिल रही है और उधर चीन इस चिंता में बैठा है कि आखिर किस तरह से अपने सामान को भारत में बिकाया जाए। बताया जा रहा है चीन में इस बार कारोबारियों ने 1000 करोड़ से ज्यादा का माल तैयार किया था और इस माल को भारत में एक्सपोर्ट करने की तैयारी थी।

इधर भारत में चीनी प्रोडक्ट्स के विरोध की ऐसी हवा चल पड़ी है कि लोग साफ तौर पर चीन के माल को नकार रहे हैं और भारत में निर्मित सामान को ही तवज्जो दे रहे हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो इसे भारत की दिवाली और चीन के उद्योग का दिवाला ही कह सकते हैं। पटाखों के साथ साथ चीन में निर्मित मोबाइल का भी जबरदस्त विरोध देखने को मिल रहा है। हाल ही में चीन ने दिवाली सेल पर भारत में अपने कई मोबाइल प्रोडक्ट्स को उतारा था, लेकिन अच्छे ऑफर्स मिलने के बावजूद लोग इस प्रोडक्ट को नकार रहे हैं। इस बीच भारत में चाइनीज पटाखों को धोबी पछाड़ देने के लिए ऐसे पटाखे तैयार हो रहे हैं जो कम आवाज वाले हैं और ज्यादा रोशनी करते हैं। हिंदुस्तान में चली ये बयार अब चीन के लिए तूफान बन गई है और ड्रैगन का बिजनेस बर्बाद होता जा रहा है।

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