गरुड़ पुराण: मृत्यु से पहले मिलते हैं ये संकेत



मृत्यु प्रकृति का अटल सत्य है। जो इस धरती पर आया है, उसे एक दिन यहां से पलायन अवश्य करना है। गरुड़ पुराण के अनुसार जब किसी प्राणी की मृत्यु का समय पास आता है तो यमराज के दो दूत मरन अवस्था में पड़े प्राणी के पास आ जाते हैं। पापी मनुष्य को यम के दूतों से भय लगता है। जिन लोगों ने जीवन भर अच्छे कर्म किए होते हैं उन्हें मरने के समय अपने सामने दिव्य प्रकाश दिखता है और उन्हें मृत्यु से भय नहीं लगता। 

गरुड़ पुराण में वर्णित है जो मनुष्य मृत्यु को प्राप्त होने वाला होता है, वह बोल नहीं पाता अंत समय में व्यक्ति की आवाज बंद हो जाती है और वह चाह कर भी बोल नहीं पाता। उसकी आवाज घरघराने लगती है जैसे कोई उसका गला दबा रहा हो। अंतिम समय में उसे ईश्वर की तरफ से दिव्य दृष्टि प्रदान होती है और वह सारे संसार को एकरूप समझने लगता है। आंखों से उसे कुछ नजर नहीं आता वह अंधा हो जाता है और उसे अपने आस-पास बैठे लोग भी नजर नहीं आते। उसकी समस्त इंद्रियों का नाश हो जाता है। वह जड़ अवस्था में आ जाता है, यानी हिलने-डुलने में असमर्थ हो जाता है। 

इसके बाद उसके मुंह से झाग निकलने लगता है और लार टपकने लगती है। पापी पुरुष के प्राण नीचे के मार्ग से निकलते हैं। आत्मा यमराज के दरबार में अपने साथ कर्मों को ले जाती है और शरीर को त्याग देती है। वहां उसके कर्मों के आधार पर न्याय होता है।

मृत्यु से पहले यमराज हर प्राणी को देते हैं ये 4 संकेत

पहला संकेत- बाल सफेद होना।

दूसरा संकेत- दांतों का टूटना।

तीसरा संकेत- आंखों की रोशनी मंद होना।

चौथा संकेत- सुंदर काया का मलीन होना अथवा रोगों की चपेट में आना।

पांचवा संकेत - हाथ पैरो अथबा शरीर के अन्य भागों में सूजन आना।

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