नहीं रुकता अगर धन और आ रही परेशानी तो करें ये उपाय

 



आज सभी की आवश्यकता है धन और धन के बिना जीवन जीना बहुत दुर्लभ है खास कर गृहस्थ व्यक्ति के लिए रात-दिन मेहनत के बाद भी पैसे की परेशानी से जूझता रहता है कुछ व्यक्ति जीवन में कठिनाइयो का सामना करते हुए पूरा जीवन व्यतीत कर देते है

आज के जीवन में धन की महत्ता से इनकार नहीं किया जा सकता हैं , पर यह धन का आगमन हो कैसे कुछ को तो व्यापार अपने परिवार से मिला हैं तो कुछ स्वतः ही इस और आकर्षित हो जाते हैं पर बहुसंख्यक वर्ग तो एक नौकरी किसी तरह मिल जाए उसी पर ही निर्भर करता हैं पर भले ही कितनी रोजगार के अवसर मिल रहे हो या सामने आ आरहे हो पर एक रोजगार मिलना या नौकरी मिलना इतना भी आसान कहाँ.

जब माता पिता की गाढ़ी कमाई के सहारे उच्च शिक्षा प्राप्त करके भी कोई मार्ग सामने दिख न रहा हो तब क्या किया जाए और कितने इस मानसिक स्थिति में असामाजिक रास्ते पर भी चल पड़ते हैं .पर जब कोई मार्ग न दिख रहा हो तो

दुखी व्यक्ति नीचे लिखे मंत्र का जप करें:-

मंत्र :- ॐ श्रीं श्रीं श्रीं परमाम् सिद्धिं श्री श्री श्रीं।

इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए पूर्ण स्वच्छता का ध्यान रखें।

पूर्ण साफ मन से प्रदोष के दिन स्नान करके प्रभु शिव का ध्यान करते हुए पूर्ण निराहार होकर व्रत (उपवास) रखें। उस दिन अन्न न लें।

शाम को (गोधूली बेला में) शिवजी का पूजन करें एवं असगंध के फूल को घी में डूबाकर रख लें।

तीन माला जाप उपरोक्त मंत्र की करें। तत्पश्चात एक माला से मंत्र पढ़ते हुए हवन करें।

यह प्रयोग 11 प्रदोष तक लगातार करें। पूर्ण फल मिलेगा।

किसी गुरु पुष्य योग और शुभ चन्द्रमा के दिन सुबह-सुबह हरे रंग के कपड़े की छोटी थैली तैयार करें। श्री गणेश के चित्र अथवा मूर्ति के आगे 'संकटनाशन गणेश स्तोत्र' के 11 पाठ करें। तत्पश्चात् इस थैली में 7 मूंग, 10 ग्राम साबुत धनिया, एक पंचमुखी रूद्राक्ष, एक चांदी का रुपया या 2 सुपारी, 2 हल्दी की गांठ ले कर दाहिनी सूंड के गणेश जी को शुद्ध घी के मोदक का भोग लगाएं। फिर यह थैली तिजोरी या कैश बॉक्स में रख दें। आर्थिक स्थिति में शीघ्र सुधार आएगा। एक साल बाद नई थैली बना कर बदलते रहें।गुरु पुष्य योग पंचांग से पता करे .

अगर आप अपार धन-समृद्धि चाहते हैं, तो आपको पके हुए मिट्टी के घड़े को लाल रंग से रंगकर, उसके मुख पर नाड़ा यानी मौली बांधकर तथा उसमें जटायुक्त नारियल रखकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।

रूके हुए आर्थिक कार्यों की सिद्धि के लिए यह टोटका बहुत ही लाभदायक है।ये क्रिया प्रत्येक रविवार को करे .

सरसो के तेल में सिके गेहूं के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पूए, सात मदार (आक) के फूल, सिंदूर, आटे से तैयार सरसो के तेल का दीपक, पत्तल या अरण्डी के पत्ते पर रखकर शनिवार की रात में किसी चौराहे पर रख कर कहें :-

ये सामान रखकर पीछे मुड़कर न देखें।ये प्रत्येक शनिवार करे तो उत्तम है अगर न कर सके तो ये हर माह में कम से कम एक बार कृष्ण पक्ष के शनिवार को अवस्य करे धीरे -धीरे भाग्य आपका साथ देना शुरू कर देगा लेकिन कर्म आप को करना है ये प्रयोग उनके लिए बिलकुल नहीं है जो अजगर की तरह घर बेठे सब कुछ पाना चाहते है लेकिन कर्म करने से कतराते है उनका भाग्य उनका भी साथ छोड देता है .

कभी -कभी हम किसी कार्य के लिए जाते है और हमारा कार्य नहीं होता है व्यक्ति कोई न कोई बहाना बना कर हमें निराश कर देता है उनके लिए ये प्रयोग अपनाए. किसी भी गणेश चतुर्थी को गणेश जी का ऐसा चित्र घर या दुकान पर लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई हो। उनकी आराधना करें। उनके आगे लौंग तथा सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो इस लौंग तथा सुपारी को साथ ले कर जाएं, तो काम सिद्ध होगा। प्रतिदिन एक लौंग और एक सुपारी अलग से भी साथ में रखें। प्रतिदिन काम पर जाने से पहले लौंग चूसें तथा सुपारी को वापस ला कर गणेश जी के आगे रख दें तथा जाते हुए कहें 'जय गणेश काटो कलेश'।

जिस प्रकार धन को छुपाकर रखते हैं उसी प्रकार झाड़ू को भी घर में आने जाने वालों की नज़रों से दूर रखें। वास्तु विज्ञान के अनुसार जो लोग झाड़ू के लिए एक नियत स्थान बनाने की बजाय कहीं भी रख देते हैं, उनके घर में धन का आगमन प्रभावित होता है। इससे आय और व्यय में असंतुलन बना रहता है। आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

वास्तु विज्ञान के अनुसार झाड़ू सिर्फ घर की गंदगी को दूर नहीं करती है बल्कि दरिद्रता को भी घर से बाहर निकालकर घर में सुख समृद्घि लाती है। झाड़ू का महत्व इससे भी समझा जा सकता है कि रोगों को दूर करने वाली शीतला माता अपने एक हाथ में झाड़ू धारण करती हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि झाड़ू में लक्ष्मी का अंश होता है। जहां झाड़ू का अपमान होता है वहां धन की हानि होती है।

जिस प्रकार देवी लक्ष्मी को आदर देते हैं उसी प्रकार झाड़ू को भी सम्मान दें। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि इसे फूल अक्षत और प्रसाद चढ़ायें। झाड़ू को आदर देने का मतलब है इसे कभी पांव नहीं लगाएं। जब भी घर की गंदगी साफ करें इसे अच्छी तरह साफ करके घर में नियत स्थान में रख दें।

देश के विभिन्न भागों में झाड़ू से संबंधित कई मान्यताएं हैं। एक मान्यता के अनुसार शाम के समय सूर्यास्त के बाद झाड़ू नहीं लगाना चाहिए इससे आर्थिक परेशानी आती है तथा घर में लड़की का जन्म होता है। उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में मान्यता है कि झाड़ू को हमेशा लेटाकर रखना चाहिए। झाड़ू को खड़ा करके रखने पर कलह होता है।

जो लोग किराये पर रहते हैं वह नया घर किराये पर लेते हैं अथवा अपना घर बनवाकर उसमें गृह प्रवेश करते हैं तब इस बात का ध्यान रखें कि आपका झाड़ू पुराने घर में न रह जाए। मान्यता है कि ऐसा होने पर लक्ष्मी पुराने घर में ही रह जाती है और नए घर में सुख-समृद्घि का विकास रूक जाता है।

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