गर्भ से नहीं तो कैसे लिया राधारानी नें जन्म, जानिए उनके जन्म से जुड़ी अनोखी कहानी

 



राधारानी को भला कौन नहीं जानता। राधारानी जिन्हें कृष्ण की प्रियतमा के नाम से जाना जाता है। 9 सितंबर 2016 को राधाअष्टमी है। इस दिन श्रीकृष्ण की प्रिया राधारानी का जन्म हुआ था।

धार्मिक मान्यताओं और कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि महाराज वृषभानु और उनकी पत्नी कीर्ति ने अपने पिछले जन्म में भगवान ब्रह्मासे वरदान मांगा तआ कि अगले जन्म में उन्हें माता लक्ष्मी एक बेटी के रुप में दे। तब भगवान ब्रह्मा नें उन्हें ये वरदान दिया।

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एक दिन जब वृषभानु जी एक सरोवर के पास से गुजर रहे थे, तब उन्हें एक बालिका कमल के फूल पर तैरती हुई मिली। जिसे उन्होंने पुत्री के रुप में अपना लिया। राधारानी जी श्रीकृष्ण जी से ग्यारह माह बड़ी थी। लेकिन श्री वृषभानु जी और कीर्ति देवी को ये बात जल्द पता चल गई थी किश्री किशोरी जी ने अपने प्राकट्य से ही अपनी आंखे नहीं खोली है। इस बात से उन्हें बड़ा दुख हुआ।

कुछ समय पश्चात जब नन्द महाराज कि पत्नी यशोदा जी गोकुल से अपने लाडले के साथ वृषभानु जी के घर आती है तब वृषभानु जी

और कीर्ति जी उनका स्वागत करती है। यशोदा जी कान्हा को गोद में लिए राधा जी के पास आती है। जैसे हू श्रीकृष्ण और राधा आमने-सामने आते है। तब राधा पहली बार अपनी आँखे खोलती है।

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अपने प्राण प्रिय श्रीकृष्ण को देखने के लिए वे एक टक कृष्ण को देखती है अपनी प्राण प्रिय को अपने सामने एक सुंदर-सी बालिका के रुप में देखकर कृष्ण जी स्वंय बहुत आनंदित होते है। जिनके दर्शन बडे-बड़े देवताओं के लिए भी दुर्लभ है।

इस तरह सुंदर राधारानीके जन्मके पीछे की कहानी है। इसी कारण से राधाअष्टमी का महत्व भी बहुत ज्यादा है। और इस उत्सव को घरो में, मंदिरों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

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