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टोटके नहीं होते है अंधविश्वास, हर टोटके के पीछे होता है एक सॉलिड लॉजिक tone totke

admin - 12:17:00 am

 



07 Aug. 21:30

लखनऊ. आज हम कितना ओपन माइंडेड होने का दावा क्यों न कर लें लेकिन आज भी हम अपने आसपास टोटकों को होते देख सकते हैं जो आज के समय में सामान्य बात हो गई है और हम में से ज्यादातर लोग इन टोटकों को अपनाते हैं। लखनऊ के कई लोगों को मानना है कि इन टोटका का प्रभाव होता है वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ये टोटकें मात्र दिखावा हैं। ऐसे में ये सवाल उठता है कि आखिर इन टोटकों का प्रयोग क्यों किया जाता है? और इन टोटकों की अस्लियत क्या हैं.ऐसे कई सवाल है जिनके जवाब हम ढूंढने की कोशिश करते है लेकिन हमे उनके जवाब नहीं मिलते। लेकिन हम आप को बता दे कि ये टोटकों के पीछे एक लॉजिक भी काम करता है जिसे जान के आप को एहसास होगा कि इन टोटकों से हमें कई फायदे भी होते थे।

टोटका व उसके पीछे का लॉजिक

1. श्मशान घाट से घर आकर नहाना अन्धविश्वाश - इससे मारने वाले की आत्मा को शांति मिलती है। लॉजिक - अंतिम संस्कार कर के आने के बाद लोग नहाते है जिससे की शव के कीटाणु उनके शरीर को नुक्सान न पहुंचाए।

2. तालाब में सिक्के फेंकना अंधविश्वास - लोग मानते है की इससे भाग्य मजबूत होता है। लॉजिक - पहले के जमाने में लोग तालाब में तांबे के सिक्के इसलिए फेंकते थे क्योंकि वे लोग मानते थे कि ऐसा करने से तालाब का पानी शुद्ध होता है। लेकिन अब यह एक अंधविश्वास बनकर रह गया है।

3. कहीं जाने से पहले दही खाना अंधविश्वास- भाग्य साथ देगा। लॉजिक - दरअसल लोग पहले कई मीलो की दुरी तय करते थे, तो वे अपने पेट को ठंडा रखने के लिए दही खाते थे जिससे उनके पेट में ठंडक रहती थी यह दही गुलुकोज का काम करती थी।

4. मंगलवार और गुरुवार को बाल न धोना अंधविश्वास- बुरा वक्त शुरू होता है। लॉजिक- पुराने समय में ये दो दिन तय थे बाल न धोने के क्योंकि उस समय पानी काफी दूर से लाना पड़ता था और महिलाओ के बाल भी लंबे होते थे जिससे पानी ज्यादा लगता था। इसलिए पानी बचाने के लिए महिलाए गुरूवार और मंगलवार बाल नहीं धोती थी।

5. मंदिर में घंटी बजाना अन्धविश्वास - माना जाता है मंदिर में घंटी बजाने से भगवान खुश होते है। लॉजिक - घंटी बजाने से जो वाइब्रेशन होता है वह हमारी बॉडी पर असर डालता है जिससे हमे ध्यान लगाने में मदद मिलती है।