कुछ लाइन जो दिल को छु लेती है।

बडी देर करदी मेरा दिल तोडने में, 

 नजाने कितने शायर आगे चले गये.

आज सच बोलते रहना कोई आसान काम नहीं, 

 

 लोग तो लोग है यहाँ आईने तक मुकर जाते है…

तुझे याद कर लूं तो मिल जाता है सुकून दिल को, 

 मेरे गमों का इलाज भी कितना सस्ता है .

वह कितना मेहरबान था, कि हज़ारों गम दे गया… 

 हम कितने खुदगर्ज़ निकले, कुछ ना दे सके उसे प्यार के सिवा।

तुम हक़ीक़त-ए-इश्क़ हों या फ़रेब मेरी आँखों का, 

 

 न दिल से निकलते हो न मेरी ज़िन्दगी में आते हो…

शर्मों हया से उनकी पलकों का झुकना इस तरह 

 जैसे कोई फूल झुक रहा हो एक तितली के बोझ से।

मुसीबत में अगर मदद मांगो तो सोच कर मागना क्योकि… 

 मुसीबत थोड़ी देर की होती है और एहसान जिंदगी भर का..!!

अभी तक मौजूद हैं इस दिल पर तेरे कदमों के निशान, 

 हमने तेरे बाद किसी को इस राह से गुजरने नहीं दिया…

झूठ बोलते थे कितना,, फिर भी सच्चे थे हम.. 

 ये उन दिनों की बात है,, जब बच्चे थे हम..

कोई ठुकरा दे तो हँसकर जी लेना, 

 क्यूँकि मोहब्बत की दुनिया में ज़बरदस्ती नहीं होती

दिल भी आज मुझे ये कह कर डरा रहा है, 

 

 करो याद उसे वरना मैं भी धडकना छोड़ दूंगा…

इश्क अभी पेश ही हुआ था इंसाफ के कटघरे में, 

 

 सभी बोल उठे यही कातिल है… यही कातिल है…

वो लौट आयी मेरी ज़िंदगी में अपने मतलब के लिये, 

 

 और मैं ये सोंचता रहा कि मेरी दुआओं का असर था…

वो बार बार पूछती है कि क्या है मोहब्बत ?? 

 अब क्या बताऊं उसे कि उसका पूछना और मेरा न बता पाना ही मोहब्बत है !

दिखावे की मोहब्बत तो जमाने को हैं हमसे पर… 

 ये दिल तो वहाँ बिकेगा जहाँ ज़ज्बातो की कदर होगी…

उसने कहा कंहा रहते हो आज कल ? 

 काश उसने एक बार अपने दिल में देखा होता।

दुनियादारी से रूबरू हुआ तो पता चला… 

 जिस्म में ज़मीर का होना इतना ज़रूरी नही 

 जितना जेब में रूपया होना...

लगता है मेरा खुदा मेहरबान है मुझ पर, 

 मेरी दुनिया में तेरी मौजूदगी यूँ ही तो नहीं है…

आज मैं आप से अपने दिल की बात कहना चाहता हूँ; 

 हाँ वही तीन अलफ़ाज़ जो आप सुनना चाहते हैं; 

 वो ही तीन अलफ़ाज़ जो आप के दिल को छू लें; 

 स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनाएं।

वतन हमारा मिसाल मोहब्बत की, 

 तोडता है दीवार नफरत की, 

 मेरी खुश नसीबी मिली ज़िंदगी इस चमन में. 

 भुला ना सके कोई इसकी खुशबू सातों जनम में. 

 

 स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनाएं।

देश भक्तों के बलिदान से, स्वतंत्र हुए हैं हम; 

 कोई पूछे कौन हो, तो गर्व से कहेंगे, भारतीय हैं 

 स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनाएं।

ज़मी ये हमारी वतन ये हमारा ! 

 उजड़ने न पाए चमन ये हमारा ! 

 

 स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनाएं।

चलो फिर से खुद को जगाते हैं; 

 अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं; 

 सुनहरा रंग है गणतंत्र का शहीदों के लहू से; 

 ऐसे शहीदों को हम सब सर झुकाते हैं। 

 स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनाएं।

संस्कार, संस्कृति और शान मिले; 

 ऐसे हिन्दू, मुस्लिम और हिंदुस्तान मिले; 

 रहे हम सब ऐसे मिल-झूल कर; 

 मंदिर में अल्लाह और मस्जिद में भगवान् मिले। 

 स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनाएं।

ज़माने भर में मिलते हैं आशिक कई; 

 मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता; 

 नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हैं कई; 

 मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता। 

 स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनाएं।

बुरे व्यक्ति पश्चाताप से भरे होते हैं. 

 - अरस्तु

मनुष्य प्राकृतिक रूप से ज्ञान कि इच्छा रखता है. 

 - अरस्तु

शिक्षा बुढ़ापे के लिए सबसे अच्छा प्रावधान है. 

 - अरस्तु

कोई भी क्रोधित हो सकता है- यह आसान है, लेकिन सही व्यक्ति से सही सीमा में सही समय पर और सही उद्देश्य के साथ सही तरीके से क्रोधित होना सभी के बस कि बात नहीं है और यह आसान नहीं है. 

 - अरस्तु

सभी भुगतान युक्त नौकरियां दिमाग को अवशोषित और अयोग्य बनाती हैं. 

 - अरस्तु

चरित्र को हम अपनी बात मनवाने का सबसे प्रभावी माध्यम कह सकते हैं. 

 - अरस्तु

मनुष्य अपनी सबसे अच्छे रूप में सभी जीवों में सबसे उदार होता है, लेकिन यदि क़ानून और न्याय ना हों तो वो सबसे खराब बन जाता है. 

 - अरस्तु

जो सभी का मित्र होता है वो किसी का मित्र नहीं होता है. 

 - अरस्तु

कोई भी उस व्यक्ति से प्रेम नहीं करता जिससे वो डरता है. 

 - अरस्तु

उत्कृष्टता वो कला है जो प्रशिक्षण और आदत से आती है.हम इस लिए सही कार्य नहीं करते कि हमारे अन्दर अच्छाई या उत्कृष्टता है , बल्कि वो हमारे अन्दर इसलिए हैं क्योंकि हमने सही कार्य किया है.हम वो हैं जो हम बार बार करते हैं.इसलिए उत्कृष्टता कोई कार्य नहीं बल्कि एक आदत है. 

 - अरस्तु

संकोच युवाओं के लिए एक आभूषण है, लेकिन बड़ी उम्र के लोगों के लिए धिक्कार. 

 - अरस्तु

किसी रोज तेरी वफाओ और मेरी वफाओ का काश इम्तिहान हो जाये,

मैं हार जाउँ, और मेरी ज़िन्दगी तेरे नाम हो जाये।

मनुष्य के सभी कार्य इन सातों में से किसी एक या अधिक वजहों से होते हैं: मौका, प्रकृति, मजबूरी , आदत, कारण, जुनून, इच्छा ! 

 - अरस्तु

अच्छा व्यवहार सभी गुणों का सार है. 

 - अरस्तु

डर बुराई की अपेक्षा से उत्पन्न होने वाले दर्द है. 

 - अरस्तु

लोग कहते हैं दुःख बुरा होता है, जब भी आता है रुलाता है। मगर हम कहते हैं दुःख अच्छा होता है, जब भी आता है कुछ सिखाता है।

Har jazbaat ko zubaan nahi milti,har arzu ko dua nahi milti,haste raho to duniya rehti hai saath,aashuo ko to aakho mai bhi panah nahi milti.

मैं मुस्लिम हूँ, तू हिन्दू है, हैं दोनों इंसान,

ला मैं तेरी गीता पढ़ लूँ, तू पढ ले कुरान,

अपने तो दिल में है दोस्त, बस एक ही अरमान,

एक थाली में खाना खाये सारा हिन्दुस्तान।


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मेरा यही अंदाज ज़माने को खलता है,

कि चिराग हवा के खिलाफ क्यों जलता है,

मैं अमन पसंद हूँ,

मेरे शहर में दंगा रहने दो,

लाल और हरे में मत बांटो,

मेरी छत पर तिरंगा रहने दो।

कोई टूटे तो उसे सजाना सीखो

कोई रूठे तो उसे मनाना सीखो 


रिश्ते तो मिलते है मुकद्दर से

बस उन्हें ख़ूबसूरती से निभाना सीखो



पूरी ज़िन्दगी हम बस यही सोच
के गुज़ार देते है
की
चार लोग क्या कहेंगे, 😑
अंत में चार लोग बस यही कहते है,
"राम नाम सत्य है"✍🌹
!! सदाबहार हैं ख्वाब तुम्हारे...

ना कोई बसंत न कोई पतझड़..!!
ये मसला नफरतों का
यूं भी हल हो गया होता,

अगर में साँप था तो ,🐍
तू ही चन्दन हो गया होता.....👶🏻
*मुझे ढूँढने की कोशिश .....अब मत किया कर......*🌹

*तूने रास्ते बदले .....तो मैंने मंजिल ही बदल दी.......*

😏😏
🎭हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार करते है,

कोई वक़्त पे लौटाता नहीं है इसलिए घाटे में है🐅
कहीं यादों का मुकाबला हो
तो, बताना साहब....

मेरे पास भी किसी की यादें,
बेहिसाब होती जा रही हैं....
☘ज़िंदा रहना है तो हालात से डरना कैसा,
जंग लाज़िम है तो.. लश्कर नहीं देखे जाते…☘
मानों तो बस "दिल का रिश्ता" है हम सभी का...

ना मानों तो "कौन और क्या" लगता है किसी का...
एक लडकी एक लडका एक दुसरे को
बहुत प्यार करते थे,
लडकी ने लडके को देखा था
पर
लडके ने लडकी को नही देखा था
वो ऑनलाइन ही बात करत थे.
एक बार दोनो ने मिलने के बारे मे सोचा
और दिन और समय तय किया
लडका बोला मैनै तुम्हे देखा
नही है तो पहचानूँगा कैसै...??
लडकी बोली मै सफेद ड्रेस मे और हाथ में एक लाल
गुलाब का फूल लेकर आऊँगी...
लडका अगले दिन सुबह खुश होकर उस लडकी से
मिलने गया
पर उसने वहाँ जा कर देखा कि
एक बूढी औरत सफेद ड्रेस में हाथ में लाल गुलाब लिए
खडी थी
लडका एक पल के लिए चौँक गया
उस बूढी औरत को देख कर पर लडके ने उस बूढी औरत से जाकर
कहा
I Love U मै ही हूँ वो जिसने
तुमसे मोहब्बत की है...
तभी वो औरत बोली
लेकिन मै वो नही हुँ
जिसने तुमसे मोहब्बत कि
है
वो तो उस पेड के पीछे खडी है
लडकी लडके के पास आई और बोली अगर मै ये
होती तो भी तुम मुझे प्यार करते...
लडके ने कहा मैंने तुमको चाहा है
तुम्हारी खूबसूरती को नही
मैनै अपने ख्यालो मै तुमको पाया है,
तुम्हारी तस्वीर को नही,
मेरी हर धडकन हर साँस
पर तुम्ही हो
तुम्हारा रूप नही मुझे कोई फर्क नही पडता इस
बात से
तुम कौन हो क्या हो...कैसी हो...
मै तो बस इतना जानता हूँ,
तुम वो जिसको मेरे दिल ने प्यार किया है...तुम वो हो जिसे मेरी आँखों ने नही मेरे दिल ने पसंद किया है...और बूढ़ा तो हम दोनों को ही होना है एक दिन इसका मतलब ये तो नही तब हमारे बीच प्यार नही होगा....
ये सुनकर लड़की की आँखों में आँसू आ गए और उसने उस लड़के को गले से लगा लिया...💞
💝💝💝pawam.varanasi
मेरे सीने में तो कभी झाँक कर देख

कितना रोता हूँ तनहाई में औरों को हँसाने के लिये
तुम्हे याद करूँ, तो कैसे करूँ,
याद करने के लिए, तुम्हे भूलना भी
तो ज़रूरी है..!! ☺
उड़ जाऊंगा तस्वीरों से,
रंगो की तरह मैं......
वक़्त की टहनी पर हूँ,
परिंदे की तरह मैं.......
ग़म में हूँ या हूँ शाद मुझे खुद पता नहीं,
खुद को भी हूँ मैं याद मुझे खुद पता नहीं,
मैं तुझको चाहता हूँ मगर माँगता नहीं ,
मौला मेरी मुराद मुझे खुद पता नहीं…
-कुमार विश्वास
जिसकी धुन पर दुनिया नाचे, दिल ऐसा इकतारा है,
जो हमको भी प्यारा है और, जो तुमको भी प्यारा है.
झूम रही है सारी दुनिया, जबकि हमारे गीतों पर,
तब कहती हो प्यार हुआ है, क्या अहसान तुम्हारा है.
जो धरती से अम्बर जोड़े , उसका नाम मोहब्बत है ,
जो शीशे से पत्थर तोड़े , उसका नाम मोहब्बत है ,
कतरा कतरा सागर तक तो ,जाती है हर उम्र मगर ,
बहता दरिया वापस मोड़े , उसका नाम मोहब्बत है .
पनाहों में जो आया हो, तो उस पर वार क्या करना ?
जो दिल हारा हुआ हो, उस पे फिर अधिकार क्या करना ?
मुहब्बत का मज़ा तो डूबने की कशमकश में हैं,
जो हो मालूम गहराई, तो दरिया पार क्या करना ?
बस्ती बस्ती घोर उदासी पर्वत पर्वत खालीपन,
मन हीरा बेमोल बिक गया घिस घिस रीता तनचंदन,
इस धरती से उस अम्बर तक दो ही चीज़ गज़ब की है,
एक तो तेरा भोलापन है एक मेरा दीवानापन.
तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है समझता हूँ,
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है समझता हूँ,
तुम्हे मै भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नही लेकिन,
तुम्ही को भूलना सबसे ज़रूरी है समझता हूँ
बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेड़े सह नहीं पाया,
हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह नहीं पाया,
अधूरा अनसुना ही रह गया यूं प्यार का किस्सा,
कभी तुम सुन नहीं पायी, कभी मैं कह नहीं पाया..
-कुमार विश्वास
नहीं कहा जो कभी, ख़ामख़ा समझती है,
जो चाहता हूँ मैं कहना कहाँ समझती है,
सब तो कहते थे ताल्लुक में इश्क़ के अक्सर ,
आँख को आँख, ज़बाँ को ज़बाँ समझती है…
-कुमार विश्वास
क्या अजब रात थी, क्या गज़ब रात थी
दंश सहते रहे, मुस्कुराते रहे
देह की उर्मियाँ बन गयी भागवत
हम समर्पण भरे अर्थ पाते रहे

मन मे अपराध की, एक शंका लिए
कुछ क्रियाये हमें जब हवन सी लगीं
एक दूजे की साँसों मैं घुलती हुई
बोलियाँ भी हमें, जब भजन सी लगीं

कोई भी बात हमने न की रात-भर
प्यार की धुन कोई गुनगुनाते रहे
देह की उर्मियाँ बन गयी भागवत
हम समर्पण भरे अर्थ पाते रहे

पूर्णिमा की अनघ चांदनी सा बदन
मेरे आगोश मे यूं पिघलता रहा
चूड़ियों से भरे हाथ लिपटे रहे
सुर्ख होठों से झरना सा झरता रहा

इक नशा सा अजब छा गया था की हम
खुद को खोते रहे तुमको पाते रहे
देह की उर्मियाँ बन गयी भागवत
हम समर्पण भरे अर्थ पाते रहे

आहटों से बहुत दूर पीपल तले
वेग के व्याकरण पायलों ने गढ़े
साम-गीतों की आरोह - अवरोह में
मौन के चुम्बनी- सूक्त हमने पढ़े

सौंपकर उन अंधेरों को सब प्रश्न हम
इक अनोखी दीवाली मनाते रहे
देह की उर्मियाँ बन गयी भागवत
हम समर्पण भरे अर्थ पाते रहे
डा. कुमार विश्वास
मावस की काली रातों में, दिल का दरवाजा खुलता है ,
जब दर्द की काली रातों में, गम आंसूं के संग घुलता हैं ,
जब पिछवाड़े के कमरे में , हम निपट अकेले होते हैं ,
जब घड़ियाँ टिक -टिक चलती हैं , सब सोते हैं , हम रोते हैं ,
जब बार बार दोहराने से , सारी यादें चुक जाती हैं ,
जब उंच -नीच समझाने में , माथे की नस दुःख जाती हैं ,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है .

जब पोथे खाली होते हैं , जब हर्फ़ सवाली होते हैं ,
जब ग़ज़लें रास नहीं आतीं , अफसाने गाली होते हैं .
जब बासी फीकी धुप समेटें , दिन जल्दी ढल जाता है ,
जब सूरज का लश्कर , छत से गलियों में देर से जाता है ,

जब जल्दी घर जाने की इच्छा , मन ही मन घुट जाती है ,
जब कॉलेज से घर लाने वाली , पहली बस छुट जाती है ,
जब बेमन से खाना खाने पर , माँ गुस्सा हो जाती है ,
जब लाख मन करने पर भी , पारो पढने आ जाती है ,
जब अपना हर मनचाहा काम कोई लाचारी लगता है ,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है

जब कमरे में सन्नाटे की आवाज सुनाई देती है ,
जब दर्पण में आँखों के नीचे झाई दिखाई देती है ,
जब बड़की भाभी कहती हैं , कुछ सेहत का भी ध्यान करो ,
क्या लिखते हो दिनभर , कुछ सपनों का भी सम्मान करो ,
जब बाबा वाली बैठक में कुछ रिश्ते वाले आते हैं ,
जब बाबा हमें बुलाते हैं , हम जाते हैं , घबराते हैं ,
जब साड़ी पहने एक लड़की का फोटो लाया जाता है ,
जब भाभी हमें मनाती हैं , फोटो दिखलाया जाता है ,
जब सारे घर का समझाना हमको फनकारी लगता है ,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है

दीदी कहती हैं उस पगली लड़की की कुछ औकात नहीं ,
उसके दिल में भैया , तेरे जैसे प्यारे जज्बात नहीं ,
वो पगली लड़की मेरी खातिर नौ दिन भूखी रहती है ,
छुप -छुप सारे व्रत करती है , पर मुझसे कुछ ना कहती है ,
जो पगली लड़की कहती है , मैं प्यार तुम्ही से करती हूँ ,
लेकिन मै हूँ मजबूर बहुत , अम्मा -बाबा से डरती हूँ ,
उस पगली लड़की पर अपना कुछ भी अधिकार नहीं बाबा ,
ये कथा -कहानी किस्से हैं , कुछ भी तो सार नहीं बाबा ,
बस उस पगली लड़की के संग जीना फुलवारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है।
कुमार विश्वास
हुए पैदा तो धरती पर हुआ आबाद हंगामा
जवानी को हमारी कर गया बर्बाद हंगामा
हमारे भाल पर तकदीर ने ये लिख दिया जैसे
हमारे सामने है और हमारे बाद हंगामा
भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूबकर सुनते थे सब किस्सा मुहब्बत का
मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा

कभी कोई जो खुलकर हंस लिया दो पल तो हंगामा
कोई ख़्वाबों में आकर बस लिया दो पल तो हंगामा
मैं उससे दूर था तो शोर था साजिश है , साजिश है
उसे बाहों में खुलकर कस लिया दो पल तो हंगामा

जब आता है जीवन में खयालातों का हंगामा
ये जज्बातों, मुलाकातों हंसी रातों का हंगामा
जवानी के क़यामत दौर में यह सोचते हैं सब
ये हंगामे की रातें हैं या है रातों का हंगामा

कलम को खून में खुद के डुबोता हूँ तो हंगामा
गिरेबां अपना आंसू में भिगोता हूँ तो हंगामा
नही मुझ पर भी जो खुद की खबर वो है जमाने पर
मैं हंसता हूँ तो हंगामा, मैं रोता हूँ तो हंगामा

इबारत से गुनाहों तक की मंजिल में है हंगामा
ज़रा-सी पी के आये बस तो महफ़िल में है हंगामा
कभी बचपन, जवानी और बुढापे में है हंगामा
जेहन में है कभी तो फिर कभी दिल में है हंगामा
कुमार विश्वास
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!
मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है !
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!
समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता !
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !!
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले !
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!
भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा!
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा!!
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का!
मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा!!
-कुमार विश्वास
सूरज पर प्रतिबन्ध अनेकों,
और भरोसा रातों पर
नयन हमारे सिख रहे हैं,
हँसना झूठी बातों पर

हमने जीवन की चैसर पर,
दाँव लगाए आँसू वाले
कुछ लोगों ने हर पल, हर छिन
मौके देखे बदले पाले

हर शंकित सच पर अपने,
वे मुग्ध स्वयं की घातों पर
नयन हमारे सीख रहे हैं,
हँसना झूठी बातों पर

कुमार विशवास
इस से पहले कि सजा मुझ को मुक़र्रर हो जाये
उन हंसी जुर्मों कि जो सिर्फ मेरे ख्वाब में हैं

इस से पहले कि मुझे रोक ले ये सुर्ख सुबह
जिस कि शामों के अँधेरे मेरे आदाब में हैं
अपनी यादों से कहो छोड़ दें तनहा मुझ को
मैं परीशाँ भी हूँ और खुद में गुनाहगार भी हूँ

इतना एहसान तो जायज़ है मेरी जाँ मुझ पर
मैं तेरी नफरतों का पाला हुआ प्यार भी हूँ....

कुमार विश्वास
मुझ में क्या है सिवा तुम्हारे ?

टी वी वाले पूछ रहे हैं ,
क्या छोड़ोगे नए साल में ?
उधर सुना है अमरीका में ,
ऐसा कुछ रिवाज़ है शायद ,
नए साल में खुद ही खुद कुछ
अपने में से कम करने का ,
मैं क्या छोडू समझ नहीं पाया हूँ अब तक ,
मुझ में क्या है सिवा तुम्हारे ?
और तुम्हें कम कर दूँ तो फिर
कहाँ बचूँगा नए साल में ......?
डॉ. कुमार विशवास
हमारा दिल बहुत ज़ख़्मी है लेकिन
मुहब्बत सर उठा के जी रही है
”बुरा” हमेशा वही बनता है,
जो ”अच्छा” बन के टूट चुका होता है..
आँख खुली तो जाग उठी हसरतें तमाम,

उसको भी खो दिया जिसको पाया था ख्वाव में।
मेरे बटुए में तुम पाओगे अक्सर नोट खुशियों के,
मैं सब चिल्लर उदासी के अलग ‘गुल्लक’ में रखता हूं.
नहीं फुर्सत यक़ीन मानो हमें कुछ और करने की,

तेरी यादें, तेरी बातें, बहुत मसरूफ रखती हैं।
कुछ अमल भी ज़रूरी है इबादत के लिए,

सिर्फ सजदा करने से किसी को जन्नत नहीं मिलती ..
करता नहीं तुमसे शिकायत ये दिल मगर,

कहना ये चाहता है के तुम वो नहीं रहे…
उससे कहना थक गया हूँ मैं खुद को साबित करते करते,
मेरे तरीके गलत हो सकते हैं लेकिन इरादे नहीं…

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