जियो की 'मुफ्तखोरी' से सरकार को हो रहा घाटा



नई दिल्ली। रिलायंस जियो की प्री लांच बीटा टैस्ट के नाम से दी जा रही मुफ्त 4G सेवा पर मोबाइल कम्पनियां भड़क गई हैं। मोबाइल कम्पनियों की संस्था सी.ओ.ए.आई. ने पीएम नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया है कि ग्राहक को 'मुफ्तखोर' बनाने की इस नीति से सरकार को घाटा हो रहा है। मोबाइल कम्पनियां स्पैक्ट्रम का इस्तेमाल करने के लिए सरकार के साथ रेवन्यू शेयरिंग करती हैं लेकिन जब रेवन्यू आ ही नहीं रहा तो सरकार के साथ शेयरिंग कैसे होगी। ये सरकार को घाटा पड़ने वाला काम है। 

COAI ने कहा कि इस तरह के बीटा टैस्ट से जो डेटा ट्रैफिक मिला वह शेष ऑपरेटरों के संयुक्त ट्रैफिक के बराबर है जबकि ये ऑप्रेटर पिछले 15 से 20 वर्षों से परिचालन कर रहे हैं। COAI ने आगे आरोप लगाया कि करीब 25 से 30 लाख सक्रिय ग्राहक व्यक्तिगत और उपक्रम, शहरी और ग्रामीण मुफ्त डेटा और वॉयस का एक ऑपरेटर से इस्तेमाल कर रहे हैं। 

COAI ने अधिकारियों से कहा कि परीक्षण के नाम पर हुई अनाधिकृत कमर्शियल सेवाओं के मामले से निपटा जाए। मौजूदा ऑपरेटरों ने दावा किया कि इससे एेसा जटिल मसला पैदा हो गया है जबकि नियामक के पास टैरिफ योजना जमा कराए बिना कमर्शियल परिचालन शुरू किया गया हैै। 

 

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