अकबर के छक्के छुडाये थे इस वीरांगना ने! जिसके बाद अकबर हिन्दू स्त्रियों के नाम से कापने लगा था!



10 Aug. 16:29

भारत की वीरांगना से जुड़ी अनेक गाथाएं अकसर सुनने को मिल जाती हैं.

लेकिन जब भी उनकी वीरता और साहस की दास्तान सुनते हैं तो गर्व से हमारा सिर ऊंचा हो जाता है.

एक ऐसा ही दिलचस्प किस्सा जुड़ा है बादशाह अकबर और भारत की एक वीरांगना से. कहा जाता है कि उस वीरांगना ने न सिर्फ अकबर की हरकतों का मुंहतोड़ जवाब दिया बल्कि उसके छक्के भी छुड़ा दिए.

आइये जानते हैं अकबर और उस वीरांगना से जुड़ी सच्ची कहानी

अकबर एक ऐसा शासक था जिसने पूरे देश पर अपनी हुकुमत चलाई.

कहा जाता है कि अकबर एक बहुत ही अय्याश और वासना से भरा हुआ इंसान भी था. अकबर की इन हरकतों से हर कोई वाकिफ था. इसलिए सभी लोग अपने घर की बहू बेटियों समेत सभी औरतों को अकबर की गंदी नज़रो से बचाकर रखने की पूरी कोशिश करते थे.

अकबर मीना बाज़ार के बहाने स्त्रियों को बाज़ार में लाने के लिए कहता था और जो स्त्री उसके मन को भा जाती थी वो उसकी आबरू लूट लेता था. इस मीना बाज़ार में सभी राजाओं की पत्नियाँ दुकान लगाती थीं.

एक बार अकबर ने देखा कि मीना बाज़ार में बीकानेर के राजा राव कल्याणमल की पत्नी दिखावे के लिए दुकान सजा कर बैठी थी. राव कल्याणमल की बूढ़ी पत्नी को दुकान लगाकर बैठा देख अकबर के मन में ये ख्याल आया कि आखिर बीकानेर परिवार की सारी औरतें इस मीना बाजार में क्यों नहीं आती हैं.

अकबर ने बीकानेर के राव को सूचना भेजकर पूछा कि राव साहब आपके परिवार की स्त्रियां हमारे मीना बाज़ार में क्यों नहीं आती. उनका इस बाज़ार में शामिल ना होना ठीक नहीं है.

राव कल्याणमल ने मौत के डर से पहले ही अपनी एक पुत्री का विवाह अकबर से कर दिया था. राव कल्याणमल बादशाह अकबर के संदेश को सुनकर विवशता वश अपने बेटे रायसिंह की पत्नी और कुछ ‍दासियों को मीना बाज़ार भेजने का फैसला किया.

इस फैसले से बड़ी बहू कंवरानी दुखी हो गई और रोते हुए देवरानी किरण कुंवर के पास आकर सारी बातें कहने लगी.

किरण कुंवर रणबांकुरे और सिसौदिया शक्तिसिंह की बेटी थी, जिनका विवाह राव कल्याणमल के छोटे बेटे गौरव पृथ्वीसिंह राठौर से हुआ था.

अपनी बड़ी जेठानी को रोते बिलखते देख किरण कुंवर ने भी उसके साथ मीना बाज़ार जाने के लिए निकल गई.

जब इन दोनों ने मीना बाज़ार में कदम रखते हुए प्रवेश द्वार पर अपना नाम लिखाया तो पहरेदारों ने अकबर को संदेश पहुंचा दिया गया कि बीकानेर राजपरिवार की दोनों राठौर वधु मीना बाज़ार में आ गई हैं.

अकबर को जब इस बात का पता कि पृथ्वीसिंह की पत्नी भी मीना बाज़ार में आई है तब अकबर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और वह ख़ुशी से झूम उठा. अकबर किरण कुंवर के आने से इसलिए खुश हुआ क्योंकि सिसौदिया घराने की लड़की उस समय तक कभी किसी बादशाह के हरम में नहीं गई थी

अकबर किरण कुंवर की सुन्दरता देख अपनी वासना पर काबू नहीं रख सका और उसको पाने के बहाने से एक दासी से संदेश भिजवाया कि उनकी ननद जो अकबर की पत्नी है उनसे मिलना चाहती हैं.

दासी का संदेश सुनते ही दोनों रानी सचेत हो गईं. यह अकबर की चाल हो सकती है. फिर किरण कुंवर ने अपनी जेठानी को छोड़कर वहां अकेले जाने का फैसला किया.

किरण कुंवर को उसकी जेठानी ने अकेले जाने से रोकने की कोशिश की, लेकिन किरण कुंवर ने कहा कि आप चिंता ना करें मैं जौहर और शस्त्र के खेल में पारांगत हूँ वह नीच बादशाह मुझे छू भी नहीं सकेगा. इतना कहकरवो किले की तरफ आगे बढ़ गई .

उस किले में सिर्फ औरतें पहरा देती थीं. पुरुष सैनिको का प्रवेश वहां वर्जित था. जब किरण कुंवर किले के अंदर पहुंची तो देखा कि किला सुनसान है, तभी अकबर ने बीच मार्ग में ही उसका रास्ता रोका. अकबर की इस हरकत को देख दासी वहां से भाग गई.

शराब के नशे में डूबा हुआ अकबर जब किरण कुंवर के साथ बद्तमीजी करने लगा, तो रानी अपने सम्मान की रक्षा करने के लिए अकबर पर एक भूखी शेरनी की तरह टूट पड़ी और अकबर की इतनी धुलाई कर दी कि अकबर खुद को बचा नहीं पाया.

रानी ने अपने जुड़े से कटार निकालते हुए अकबर के बाल को पकड़कर घसीटा और अकबर की धुलाई करने लगी. रानी के लात घुसे खाने के बाद अकबर गिर पड़ा. अंत में अकबर ने किरण कुंवर के सामने अपने दोनों हाथ जोड़ लिए और गिगिड़ाते हुए उससे माफी मांगने लगा.

किरण कुंवर अकबर को जान से मार सकती थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया क्योंकि उसके पति को अकबर ने बंदी बनाकर रखा हुआ था. ऐसा करने से उसके पति के प्राण संकट में पड़ सकते थे. इतना ही नहीं इससे मुग़ल सैनिक हिन्दूओं पर जुर्म ढाने लगेंगे, स्त्रियों का अपहरण, बलात्कार और शोषण करने का उन्हें बहाना मिल जाएगा. ये सोचकर रानी ने अकबर के गले के पर कटार रखते हुए कहा कि मैं तुझे माफ कर दूंगी लेकिन अगर दोबारा किसी स्त्री की इज्ज़त पर हाथ रखा तो सिर को धड़ से अलग कर दूँगी.

इस घटना के बाद अकबर ने हरम और मीना बाज़ार लगाकर स्त्रियों का शोषण करना बंद कर दिया क्योंकि अकबर दो बार मरते-मरते बचा था और समझ चुका था कि तीसरी बार उसको कोई भी मौका नहीं मिलेगा.

ये थी भारत की वीरांगना – और अकबर की सच्चाई.

अकबर सिर्फ एक हिन्दुस्तानी स्त्री से नहीं बल्कि और भी कई हिंदू स्त्रियों से मार खा चुका था इसलिए वो हिंदू स्त्रियों के नाम से कांपता था.

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