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कुंती से मिलने यहां आए थे सूर्य देव, आज भी चट्टान पर हैं घोड़े की टापों के निशान

admin - 5:08:00 am


Acl media 03 Aug.2016 16:08

ग्वालियर। मुरैना के कुतवार में पांडवों  और कर्ण की मां कुंती से मिलने उतरे सर्य देव के घोड़ों की टापों के निशान आज भी आसन नदी के किनारे मौजूद हैं। कुंती के मायके कुतवार और नूराबाद में महादजी सिंधिया की प्रेमिका गन्ना बेगम की खंडहर होती मजार को अब ASI टूरिस्ट स्पॉट के तौर पर विकसित कर रही है। करोड़ों से सहेजे जाएंगे सूरज के घोड़ों की टापों के निशान....

- मथुरा के राजा और कंस के पिता उग्रसेन ने अपनी बेटी पृथा को अपने भाई और कुंतलपुर के राजा सूर सेन को कुछ धार्मिक कारणों से गोद दे दिया था।
- कुंतलपुर आने के बाद पृथा का नाम कुंती रखा गया। कुंती ने राज्य में मेहमान बनकर आए महर्षि दुर्वासा की सेवा की तो प्रसन्न होकर उन्होंने कुंती को किसी भी देवता से पुत्र प्राप्त कर सकने की शक्ति दी।
- उस वक्त कुंती कुंआरी थीं, लेकिन कौतूहलवश उन्होंने शक्ति का प्रयोग कर सूर्यदेव का आव्हान कर दिया। सूर्यदेव आए तो आसन नदी के किनारे की वह पथरीली चट्टान पिघल गई, और सूर्य देव के घोड़ों की टापों के निशान बन गए। उस चट्टान पर वो निशान आज भी मौजूद हैं।
  कुंती के मायके में ये होगे सुधार
- कुंतलपुर में आसन नदी किनारे सूर्य रथ के घोड़ों की टापों के निशान व कुंती का कुआं आज भी है।
-इसके अलावा कुंती ने जिस जगह से कर्ण को स्वर्ण मंजूषा में रख कर नदी में बहाया था, वह भी कर्ण खार के नाम से मौजूद है।
- इसके अलावा यहां पांडवों का बनाया मंदिर भी है।
- इन सभी को सहेजने के लिए किलाबंदी की जाएगी, साथ ही इन स्मारकों को क्षरण रोकने के उपाय किए जाएंगे।
- इस काम के लिए 89.34 लाख रुपए की DPR बनाई गई है।
  गन्ना बेगम के मकबरे को भी सहेजा जाएगा
- बंगाल के नबाव की जबरिया बनाई गई बेगम गन्ना ने उसके गुलामी से भाग कर महादजी सिंधिया की सेना में सिख वेश में नौकरी की थी।
- बाद में वही महादजी से प्रेम करने लगी थी, और महादजी ने उसके भाषाओं के ज्ञान की वजह से अपनी निजी पत्र लेखक बना लिया था।
- महादजी के खिलाफ षडयंत्र रचने शुजाउद्दौला नूराबाद आया था, इसकी भनक गन्ना को लग गई थी।
- गन्ना उसकी साजिश का पता करने बुरका पहन कर गई थी, लेकिन पहचान ली गई।
- शुजाउद्दौला के हाथों बेइज्जत होने से पहले गन्ना ने जहर खाकर जान दे दी थी।
- महादजी सिंधिया ने नूराबाद में गन्ना की याद में मकबरा बनवा दिया था।
- गन्ना बेगम की मजार पुरातत्व विभाग का एक संरक्षित स्मारक है। यहां पर्यटक आते हैं, लेकिन इसका पिछले कई सालों से रखरखाव न होने के कारण इसकी हालत खराब होती जा रही है।
- इसे सहेजने के लिए 76.1 लाख रुपए की DPR बनाई गई है, इसमें मजार के प्लेटफार्म और मकबरे की इमारत की मरम्मत कराई जाएगी।
- इसके साथ ही यहां सैलानियों की सुविधाओं के लिए भी बुनियादी संसाधन विकसित किए जाएंगे।
- कुंती के मायके नूराबाद-कुतवार में नूराबाद का किला और सरायछोला पुल को भी करीब 1.5 करोड़ से सहेजा जाएगा।
 

स्लाइड्स में है चट्टान जहां उतरे थे सूर्यदेव, और नूराबाद में उजड़ती गन्ना बेगम की मजार....