Show Mobile Navigation

लेबल

, ,

45 दिन तक करें ये उपाय नहीं होगा शनि की साढ़ेसाती का असर

admin - 12:26:00 pm

 

13 Aug. 16:49


ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को सबसे प्रभावी ग्रह माना जाता है। लोग सबसे अधिक शनि की साढ़ेसाती और शनि ढैय्या के बारे में जानते हैं। किंतु ढैय्या से भी अधिक अशुभ फल देती है शनि की साढ़ेसाती। यदि किसी जातक की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती हो, साथ ही शनि की दशा, अंतर्दशा हो और शनि वक्री भी हो तो ऐसे जातक का जीवन बर्बाद हो जाता है। उसका घर, परिवार, आय के साधन सभी शनि की चपेट में आ जाते हैं। धीरे-धीरे करके मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है। ऐसे में शनि साढ़ेसाती के साथ दशा, अंतर्दशा और इस ग्रह के वक्री होने का भी उपाय किया जाता है। ये उपाय इस प्रकार हैं ....

शनि साढ़ेसाती के लिए घोड़े की नाल का छल्ला दाहिने हाथ की मध्यम अंगुली में शनिवार के दिन शनि मंत्र का उच्चारण करने के पश्चात धारण किया जाता है।

वृष राशि वाले बालकों का पढ़ाई में नहीं लगता मन तो करें ये उपाय

शनि की दशा, अंतर्दशा और वक्री के लिए हनुमान चालीसा का पाठ लाभदायक माना गया है। शनि की चपेट में आए हुए जातक को रोजाना, पूरे 45 दिन तक हनुमान चालीसा का पाठ कम से कम तीन बार, हनुमान जी की तस्वीर समाने स्थापित करके करना चाहिए। उसके पश्चात पूरी दशा अवधि में कम से कम एक बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। इसके लिए हनुमान जी की संजीवनी पर्वत लाते हुए दर्शाई गई तस्वीर इस्तेमाल की जानी चाहिए।

यहां क्लिक करें ! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

दरअसल हनुमान जी की संजीवनी पर्वत लाने वाली तस्वीर दो बातें दर्शाती है पहली यह कि इस कार्य को करते हुए हनुमान जी श्रीराम के भाई लक्ष्मण और अन्य वानर सैनिकों के कष्ट दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं संजीवनी पर्वत लाते हुए पवन पुत्र हनुमान रफ्तार से वायु का सामना कर रहे हैं, जो इस उपाय को भी इसी तेजी से सफल बनाता है।

यदि जातक कुल 45 दिनों तक, बिना कोई दिन छोड़े, रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ कर ले तो उसके ऊपर से शनि का बुरा प्रभाव टल जाएगा। वह स्वयं ही 45 दिनों के पश्चात अपने स्वभाव और जीवन में बड़े बदलाव देख सकेगा।