राजपुर के गौशाला में चार दिनों में 25 से अधिक गायों की मौत

बेमेतरा . राजपुर में संचालित शगुन गौशाला में चार दिनों के भीतर 25 से अधिक गायों की मौत इलाज व चारा के अभाव में हो चुकी है। संचालक ने शासन को एक गौशाला में 900 गायें होने का आंकड़ा पेश किया है, जबकि मौके पर सिर्फ 250 गाय ही है। सप्ताहभर पहले गौसेवा आयोग के अध्यक्ष बिसेसर पटेल ने गौशाला में अनियमितता पकड़ी थी। इसके बाद भी गौशाला में व्यवस्था सुधारा नहीं गया। दो जिले के कलक्टर भी अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। जानकारी के अनुसार धमधा ब्लाक दुर्ग जिला के अंतर्गत है। दूसरी तरफ रानो व गोडमर्रा बेमेतरा जिले के क्षेत्र में हैं। इस गंभीर मामले में दोनों जिलों की संयुक्त टीम को जांच करना जरूरी है।

बीमार गायों का इलाज नहीं कराया

बताना होगा कि प्रदेश में गौशालाओं में गायों की अकाल मौतें होने के मामले सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में जिले में रानो, गोड़मर्रा व दुर्ग जिले के राजपुर में संचालित गौशालाओं में गायों की हो रही अकाल मौत का मामला भी जुड़ गया है। सबसे विकराल स्थिति दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम राजपुर का है। जहां संचालक हरीश ने बीमार गायों का इलाज नहीं कराया। वहीं चारे के अभाव में भी गायों की अकाल मौत हो रही है। मौके पर पहुंचे छत्तीसगढ़ कांग्रेस नेता हर्षवर्धन तिवारी ने बताया कि राजपुर के गौशाला के अंदर 2 गायें बीमार हालात में थी और 2 की मौत हो चुकी थी। तिवारी ने बताया कि गौशाला के दायरे में पीछे से बने तालाब में प्रतिबंधित थाईलैंड की मंगूर मछली का पालन किया जा रहा है। यह मछली मांस खाती है। मृत गायों को इस तालाब में मछलियों के खाने के लिए फेंक दिया जाता है।

एक साथ तीन गौशाला चला रहा संचालक

संचालक हरीश एक साथ तीन गौशाला का संचालन कर रहा है। जो मयूरी गौशाला (रक्षा केंद्र) रानो, फूलचंद गौशाला गोड़मर्रा व शगुन गौशाला जीव रक्षा केंद्र राजपुर में संचालित है। गौसेवा आयोग के अध्यक्ष बिसेसर पटेल के अनुसार तीनों गौशाला में मौके पर 600 गायें भी नहीं है। और जो गायें हैं वह कमजोर व बीमार हैं।

इलाज के लिए नहीं बुलाते डाक्टर

गाड़ाडीह के उपसरपंच कोमल साहू ने बताया कि गौशाला में गायें बीमार हैं। लेकिन डॉक्टर को बुलाया नहीं जाता। राजपुर के छबीराम साहू ने बताया कि मरी हुई गायों को बाहर फेंक दिया जाता है। मौके पर 10 से अधिक गायों के अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं। ग्रामीणों के अनुसार 4-5 दिनों में 25 गायों की मौत हो चुकी है।

चारा की जगह ईंट, गिट्टी व फावड़ा

दिलीप पटेल व शत्रुहन साहू ने बताया कि मैंने वर्तमान में ही राजपुर गौशाला देखा है। वहां पर चारे का अभाव है। जिस जगह चारा-पानी होना चाहिए, वहां पर ईंट-गिट्टी रखा जाता है। स्थिति चिंताजनक है। गौशाला के जानकार नारद सिंह विश्वकर्मा व रमेश साहू ने बताया कि गायों को गौशाला में ही मौत मिल रही है।

गौशाला में व्यवस्था सुधारने कहा था

गौसेवा आयोग के अध्यक्ष बिसेसर पटेल ने कहा कि रानो, गोड़मर्रा, राजपुर के बाद प्रदेश में घूम रहा हूं। जब से तीनों गौशाला का निरीक्षण किया है, तब से प्रदेशबर के गौशाला का निरीक्षण कर रहा हूं। प्रदेशभर के गौशाला की जांच करने का निर्देश मुख्यमंत्री ने दिया है। इसके अलावा आयोग टीम गठित कर जांच करा रही है। इसके बाद कार्रवाई होगी।

अधिकारियों ने कही जांच व कार्रवाई की बात

बेमेतरा कलक्टर रीता शांडिल्य ने कहा कि गौशाला की शिकायत मिली है। उपसंचालक पशु सेवा से जांच कराऊंगी। शिकायत सही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। धमधा एसडीएम सीआर मरकाम ने कहा कि दो दिन पहले दो बूढ़ी गाय के मरने की जानकारी मिली थी। इतनी संख्या में गायों के मरने की जानकारी नहीं है। यदि ऐसी घटना हुई है और मृत गायों को तालाब में फेंका गया है, तो यह गंभीर मामला है। कल ही टीम भेजकर जांच करवाई जाएगी। घटना सही पाई गई तो कार्रवाई होगी। इस संबंध में शगुन गौशाला राजपुर के संचालक हरीश साहू से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि गौशाला में 250 गाय रखने की अनुमति है। लेकिन यहां उससे दोगुना गायों को रख रहे हैं। हमें सिर्फ 250 गायों का अनुदान मिलता है।

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