विवाह के सात फेरे और उनका महत्व Vivah ke sath fere or unka mahatva, importance of 7 fere in marriage

नई दिल्ली (खबर का स्रोत-संवाददाता/प्रतिनिधि/एजेन्सी): हिंदू रीति रिवाजों से किये गए विवाह को अगर कोई बात विवाह के अन्य प्रचलित तौर तरीकों से अलग बनती हैं, तो वो है शादी में लिए जाने वाले सात फेरे| वैदिक मंत्रोंच्चारण के बीच इन फेरो का महत्व इसलिए भी अधिक हो जाता है क्योंकी इन फेरो के साथ जुड़े होते है कुछ ऐसे वचन और प्रतिज्ञाएं जिनका अनुपालन करने की अपेक्षा दूल्हा और दुल्हन दोने से की जाती है| दो लोगो को सम्पूर्ण जीवन के लिए आपस में जोड़ने वाली ये प्रथा ने केवल एक दूसरे के सुख दुख़ में साथ रहने की प्रतिबद्धता होती है बल्कि एक विश्वास भी उत्पन्न करती है की वो दो लोग जो विवाह के बंधन में बंधने जा रहे है आजीवन एक दूसरे के प्रति हर परिस्थिति में तटस्थ रहेंगे|

आइए जानते है की किस तरह शादी के हर एक फेरे का क्या महत्व और उद्देश्य होता है|

 

पहला फेरा: एक दूसरे की देख-रेख एवं कल्याण का दायित्व

पहले फेरे के साथ दोनों ही लोग ईश्वर से ऐसी प्रार्थना करते है के वह उन्हें एक सम्मानित एवं गरिमयपूर्ण जीवन प्रदान करे| पहले फेरे के पहले वचन के अंतर्गत दूल्हा ये वचन देता है की वह जीवन भर अपने जीवन साथी के कल्याण हेतु प्रयास करेगा और दुल्हन भी जीवन की सभी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों में सहयोग करने का वचन लेती है

दूसरा और तीसरा फेरा: प्रेम और संरक्षण का वचन

इन फेरो को साथ दूल्हा और दुल्हन ईश्वर से ऐसी कामना करते है की वह उनको अच्छा मानसिक और शारीरिक स्वस्थ एवं संम्पति और समृद्धि प्रदान करेंगे

तीसरे फेरे के साथ लिए जाने वाले वचन के अंतर्गत दूल्हा और दुल्हन ये वचन लेते है की जीवन की हर परिस्थिति और दशा में वे एक दूसरे के प्रति प्रेम बनाए रखेंगे और आजीवन एक दूसरे का साथ देंगे|


चौथा फेरा: परिवार की गरिमा के लिए

चौथे फेरे के अंतर्गत दूल्हा और दुल्हन ईश्वर से उन्हें पर्याप्त सामर्थ्य देने की आशा करते है जिससे वह अपने परिवार की देख रेख ठीक ढंग से कर सके और इसकी प्रतिष्ठा को बनाए रख सके| इस फेरे के साथ दूल्हा ये वचन देता है की वह अपनी जीवन संगिनी के प्रति पूरी निष्ठां और प्रेम बनाए रखेगा और साथ ही दुल्हन ये वचन देती है की जीवन के अच्छे और बुरे दोनों ही समय में वह अपना प्रेम और साथ निरन्तर बनाए रखेंगी|

पांचवा फेरा: एक अच्छे दांपत्य जीवन हेतु

इस विवाह के साथ ही नव दंम्पत्ति बनने जा रहे दूल्हा और दुल्हन ईश्वर से ऐसी कामना करते है की वह उन्हें अच्छी संतान प्रदान करे जिनकी श्रेष्ठ परवरिश और संस्कारो हेतु दोनों ही प्रयासरत रहेंगे|

छठा और सांतवा फेरा: एक शांतिपूर्ण एवं मंगलमय जीवन हेतु

प्रणय के इस पवित्र बंधन में बंधने के लिए इन फेरो के द्वारा दूल्हा और दुल्हन ऐसी प्रार्थना ईश्वर से करते है की वह उन्हें अपने साथी के साथ एक ऐसा जीवन प्रदान करे जो प्रेम, सम्मान, आपसी विश्वास पर आधारित हो| साथ ही उन दोनों का ही जीवन किसी भी रोग से विहीन हो और उनकी काया स्वस्थ बानी रहें

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