बिडम्बना शिवपुरी की। नरक से भी बद्तर जीवन जीने को मजबूर शिवपुरी की जनता। एक खास रिपोर्ट। shivpuri ki durdasha


रोहित बंसल
शिवपुरी


आइये पहले आपको कुछ चित्र दिखाते है।




शिवपुरी में शिव सरकार की दुर्दशा: अंधेरर्गदी का अखाड़ा बना शहर

म.प्र. शिवपुरी। यह कोई कहानी नहीं बल्कि म.प्र. के एक ऐसे शहर का सच है, कभी जहां के निवासी 100 वर्ष पूर्व मौजूद नैसर्गिक सुविधाओं पर इठलाते नहीं थकते थे। क्योंकि उस समय यह शहर तत्कालीन स्टेट की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करता था। जिसमें सचिवालय व अधिकारियों की बड़ी-बड़ी कोटिया, होटल, खेल-मैदान, सांस्कृतिक भवन, क्लब, सीवर लाइन शहर के अन्दर चौड़ी-चौड़ी सड़के शहर के चारों ओर रिंग रोड़ कुओं, तालाबों का शुद्ध पेयजल, नेशनल पार्क, वोट हाउस, सुन्दर झील, अब्बल समुचे शहर को वातानुकूलित रखने बीसियों ताल तलैयाऐं और हरे-भरे जंगल थे।

अगर यो कहें कि जंगलो के साथ ही शहर के अन्दर आम जामफलो जैसे फलो के बगीचे थे। मगर आज सारी सुविधायें काफुर है। न तो शहर वासियों को पीने शुद्ध पेयजल न ही शहर में चौड़ी-चौड़ी सड़के और न ही कुऐं बावडिय़ों का नामो निशान बचा है। रहा सवाल ताल-तलैयों का तो अब इन में पानी की जगह कॉलोनियो कट बड़े-बड़े भवन खड़े है, वहीं अतिक्रामको शहर के नाले और सड़को को पाट भवन तान रखे है उन भ्रष्ट अधिकारियों के संरक्षण में जो या तो भ्रष्टाचार की अकूत कमाई कर शहर छोड़ चुके है तो कुछ यहीं पर बने हुये है।

बहरहॉल बात बहुत ल बी है, अगर हम यहां पर बात शहर वासियों को शुद्ध पेयजल और सड़को की हालात की ही कर ले, तो अंधेरर्गदी का आलम पता चल जायेगा। देखा जाये तो शहर मेंं सप्लाई होने वाले शुद्ध पेयजल की बात करे तो शहर में पेयजल शहर में मौजूद बोर बेल या फिर चाँदपाटा झील से किया जाता है। जिस झील में सारे शहर के गन्दे नालो का पानी गटर गन्दगी के साथ बरसाती पानी चांदपाठा पहुंच जाता है। जिसके लिये सिन्ध जलावर्धन की शुरुआत हो करोड़ो फूकने के बावजूद बन्द हो चुकी है। वहीं सड़को का आलम यह है कि जिला मु यालय पर मौजदू अधिकारी रोजाना ऊबड़-खाबड़ सड़को से गुजर न जाने किसका लिहाज करते है इन सड़को पर तैनात उपयंत्री पगार सरकार से ले किसकी नौकरी करते है, किसी को पता नहीं।

 मगर माननीय न्यायालय के आदेशों को नकार अंधेरर्गदी पर तुली शिव सरकार की नौकरशाही को इतना भी इल्म नहीं कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह स्पष्ट किया है कि और कानूनों में भी लिखा है,कि जनसुविधाओं की बिना पर विकास नहीं होना चाहिए। मगर इस शहर में वह सबकुछ खुले आसमान के नीचे हो रहा है जो नहीं होना चाहिए। धन्य है शिवपुरी शहर की जनता जिसकी जुबान आज भी बन्द है। नहीं तो क्या बात है,कि इस शहर में इतनी दुशबारियों बढऩे के बाद भी कोई आवाज नहीं उठती। शहर की जनता ने तो अंगे्रजो की गुलामी तक को मात कर दिया कम से कम उस समय लेाग आजादी के लिये तो लड़े थे। ये तो खुद की सुविधाओं पर पड़े डांके पर भी चुप है। इससे बड़े त्याग और गुलामी की मिशाल और कहां मिलेगी। जो शिवपुरी में शिव सरकार के राज में देखने भोगने मजबूर लेागों को मिल रही है।

आज यहाँ नरक से भी बद्तर हालात हो चुके है। सारे शहर की सड़को को एक साथ खोदकर डाल दिया गया है। 

कुछ सड़के बनी भी है तो इतनी घटिया की महीने भर में ही धस रही है।

लोग गिर रहे है चोटिल हो रहे है। किसी को कोई सुध नही। क्या होगा इस शहर का?


हम आपको फ़ोटो के जरिये शिवपुरी की दुर्दशा से रूबरू करने की हिमाकत कर रहे है और यह भी सिर्फ नाम मात्र है। 


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