आजादी के सिपाही की अंतिम यात्रा में उमड़े लोग

आजादी के सिपाही की अंतिम यात्रा में उमड़े लोग

शिवपुरी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ भारत छोड़ो आंदोलन सहित स्वतंत्रता आंदोलन में एक योद्धा के रूप में अंग्रेजों से लड़ाई लड़ने वाले शिवपुरी के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लालसिंह चौहान ने 94 साल की उम्र में रविवार को लंबी बीमारी के बाद अंतिम सांस ली। सोमवार को उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। तिरंगे में लिपटे चौहान के शव को पुष्पांजलि अर्पित की गई।

स्थानीय मुक्तिधाम पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ चौहान को अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान नपाध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह, कोलारस विधायक रामसिंह यादव, कलेक्टर राजीव दुबे, एडीएम नीतू माथुर, एसपी मोहम्मद यूसुफ कुर्रेशी, एडिशनल एसपी कमलसिंह मौर्य मौजूद रहे।

शिलालेख में दर्ज था चौहान का नाम

लाल सिंह चौहान के स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने का उल्लेख जिले के ग्राम मुढ़ैरी से 1973 में मिले शिलालेख भी हैं, जिसमें शिवपुरी जिले से स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले 26 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम अंकित थे। हालांकि प्रशासनिक सूची में जिले में 27 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हैं।

8 माह बिताए जेल में

आजादी के आंदोलन के सिपाही लाल सिंह चौहान का जन्म 1 जुलाई 1922 को शिवपुरी में हुआ था। उनकी प्राथमिक शिक्षा महज प्राइमरी तक है, लेकिन उनके अंदर मौजूद देश भक्ति की भावना के कारण वह 16 साल की उम्र से स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा चलाए जा रहे भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

अंग्रेजी हुकूमत ने उनकी गिरफ्तारी की और उन्हें 4 अक्टूबर 1942 से 29 जून 1943 तक लगभग 8 माह सेंट्रल जेल ग्वालियर में रखा। इसके बाद भी वह आजादी के आंदोलन में लगातार सक्रिय रहे। उनका विवाह काशी बाई से हुआ। उनके तीन पुत्र और चार पुत्रियां हैं।

उन्हें 15 अगस्त 1972 से स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों को मिलने वाली पेंशन देने का सरकार ने निर्णय लिया और 18 अगस्त 1973 को तत्कालीन मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल ने उन्हें ताम्रपत्र भेंट कर सम्मानित किया। वहीं राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने भी उन्हें सम्मानित किया।

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