कौन कौन से कार्यो को मल मास में ना करे ।

मल मास । ? खरमास आरम्भ
पौष माह आरम्भ ।

कौन कौन से कार्यो को मल मास में ना करे ।

लोगो को कई भ्रान्ति होती है की मल मॉस में सभी शुभ कार्य बंद हो जाते है। जबकि ऐसा नही है । मांगलिक कार्यो में त्रिबल की आवश्यकता होती है । जबकि अन्य कार्यो में केवल चंद्र बल देखा जाता है । इसलिए सभी कार्य वर्जित नही ।।

केवल विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत,
द्विरागमन, वर वरण, कन्या वरण, वाग्दान, नूतन गृह प्रवेश, गृहारंभ, कर्णवेध, दीक्षा ग्रहण इत्यादि ||
सकरणीय कर्म मल मास में कदापि ना करे ।।

इसके विपरीत अन्य कार्य जैसे सर्व वस्तु क्रय-विक्रय, कोई भी नयी वस्तु वाहन मसीनरी कपडे ,प्रसूतिस्नान, नामकरण, अन्नप्राशन, पौधरोपण, आभूषणनिर्माण व धारण करना, औषधि निर्माण, नौकरीआरंभ, संपत्ति विभाजन आदि कार्य करने में मल मास का कोई दोष नही माना जाता है ।।

16 दिसंबर 2015 की
रात्रि को 11:47 बजे
सूर्य वृश्चिक राशि को छोड़ कर धनु राशि में प्रवेश करेगा
जिसकारण खरमास प्रारम्भ हो जाएगा और
15 जनवरी 2016 के प्रात:काल 7:34 बजे तक खरमास रहेगा ||
अतः शुभकार्य खरमास के समय करना वर्जित होता है ||
खरमास वर्ष में दो बार आता है ||
एकबार जब सूर्य का प्रवेश धनु
राशि में और
दूसरी बार जब ये मीन राशिगत होते हैं ||
दोनों बार सूर्य का प्रवेश वृहस्पति के घर में होता।है ||
बहुत से शुद्ध कार्यों के लिए त्रिबल शुद्धि की आवश्यकता होती है ||
त्रिबल अर्थात
सूर्य, चंद्रमा और वृहस्पति का बल ||
खरमास में
दो ग्रहों- सूर्य व चंद्रमा का बल बना रहता है परन्तु तीसरे ग्रह वृहस्पति का तेज सूर्य के आने से क्षीण हो जाता है ||
इसलिए बहुत से महत्वपूर्ण शुभ कार्य स्थगित हो जाते हैं || 
परंतु अन्य शेष ग्रहों के बल के कारण अनेकानेक कार्य किए जा सकते हैं ||
निषिद्ध कार्य
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विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत,
द्विरागमन, वर वरण, कन्या वरण, वाग्दान, नूतन गृह प्रवेश, गृहारंभ, कर्णवेध, दीक्षा ग्रहण इत्यादि ||
सकरणीय कर्म
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सर्व वस्तु क्रय-विक्रय, प्रसूतिस्नान, नामकरण, अन्नप्राशन, पौधरोपण, आभूषणनिर्माण व धारण करना, औषधि निर्माण, नौकरीआरंभ, संपत्ति विभाजन आदि |।

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