आमिर खान के बड़बोले बयान पर कवि कमल आग्नेय की रचना

शाहरुख़ का मुँह बन्द हुआ था
फिर  से   आमिर   बोल  गया।
भारत  से  शीतल  चन्दन  पर
वो  अपना   विष  घोल  गया।।

सत्यमेव    के    नायक    का
जब   कर्म  घिनौना  होता  है।
इन पर लिखने से कविता का
फिर  स्तर   बौना   होता  है।।

पर  तटस्थ  रहना  सीखा  है
कब दिनकर की  संतानों  ने।
भारत  का  ठेका ले  रखा है
बॉलीवुड के  इन  खानों  ने।।

श्रीराम  की  पावन  भूमि पर
जिनको    डर     लगता   है।
पाक,  सीरिया,  यमन   इन्हें
मनमानस का घर लगता है।।

इनसे   कह   दो   भारत   में
खुशहाल   मवेशी   रहते  हैं।
कश्मीरी  पण्डित  से ज्यादा
यहाँ   बंग्लादेशी   रहते  हैं।।

बचपन में हो खेले जिस पर
उस माटी से मतभेद किया।
जिस थाली में खाया तुमने
उस थाली मे ही छेद किया।।

भारत ही बस  मौन रहा  है
शिवजी   के   अपमान   में।
पी. के. जैसी  फ़िल्म बनाते
यदि   तुम  पाकिस्तान    में।।

जीवन - रक्षा  की   खातिर
हाफिज  को  मना रहे होते।
अभिनेता तो  न  बन  पाते
बस  पंचर  बना  रहे होते।।

जितना    भारत   से  पाया
अब देते   हुए लगान  चलो।
बोरिया-बिस्तर बाँधो आमिर
जल्दी   पाकिस्तान   चलो।।

रचना: कवि कमल आग्नेय
स्त्रोत- व्हाट्सएप्प

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