करवा चौथ का पूजन करने वाली सुहागिन महिलाओं के लिए सांध्यकालीन पूजन का समय karva chauth 2015 pujan muhurt

करवा चौथ स्पेशल


ऐ चाँद तूम आज जल्दी ही आ जाना

की तेरे इन्तेजार में मेरा चाँद बुझा सा है...

रोहित बंसल

9993475129

शिवपुरी


चतुर्थी तिथि प्रारम्भ = 30/अक्टूबर/2015 को 08:24 बजे चतुर्थी तिथि समाप्त = 31/अक्टूबर/2015 को 06:25 बजे तक।

सोलह श्रृंगार से सजी-धजी सुहागिनें करवा चौथ पर चांद की आभा लिए होंगी।

इन्हें आज अपने-अपने 'चांद' का बेसब्री से इंतजार रहेगा।

इसलिए नहीं कि वे आज निर्जल हैं बल्कि इसलिए कि चंद्रदेव के दर्शन कर व अर्घ्य देकर अपने पति यानी चांद के दीर्घायु जीवन की कामना कर अखंड सौभाग्य का वर प्राप्त करना है।

करवा चतुर्थी चंद्रोदय व्यापिनी है। रात 8 बज कर 26 मिनट पर चंद्रमा का उदय होगा। व्रतधारी सौभाग्यवती महिलाएं चंद्र दर्शन पश्चात अर्घ्य देकर पति के हाथों से जल ग्रहण कर उपवास को पूर्णता प्रदान करेंगी।

करवा चौथ का पूजन करने वाली सुहागिन महिलाओं के लिए सांध्यकालीन पूजन का समय = 17:33 से 18:52 अवधि = 1 घण्टा 18 मिनट मान्यता के अनुसार करवा चतुर्थी पर चांद को प्रत्यक्ष नहीं देखना चाहिए। वरन्‌ प्रतिबिंब का दर्शन कर व्रत खोलना चाहिए ।

करवा चौथ के चार दिन बाद पुत्रों की दीर्घ आयु और समृद्धि के लिए अहोई अष्टमी व्रत किया जाता है।
पौराणिक काल का करवाचौथ का व्रत
भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने करवाचौथ का व्रत रखा था। मान्यता है कि इसी करवाचौथ व्रत से पांडवों को  महाभारत युद्ध में विजय मिली थी। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को दिन भर निर्जल व्रत रखने के बाद, शाम को चंद्रमा को जल का अर्घ्य देने के साथ व्रत संपन्न होता है। इस दिन सिर्फ चंद्रमा की ही पूजा नहीं होती। बल्कि करवाचौथ को शिव-पार्वती और स्वामी कार्तिकेय भी पूजा की जाती है।

शैलपुत्री पार्वती ने भी शिव जी को इसी प्रकार के कठिन व्रत से पाया था। इस दिन गौरी पूजन से जहां महिलायें अखंड सुहाग की कामना करती हैं, वहीं अविवाहित कन्या , सुयोग्य वर पाने की प्रार्थना करती हैं। द्वापर युग में एक बार अर्जुन, वनवास के दौरान नीलगिरी पर्वत पर तपस्या करने गये थे। जब कई दिनों तक अर्जुन वापस नहीं आये, तो द्रौपदी को चिंता हुई।

तब कृष्ण जी ने द्रौपदी से न सिर्फ करवाचौथ व्रत रखने को कहा बल्कि शिव द्वारा पार्वती जी को जो करवाचौथ व्रत की कथा सुनाई गई थी, उसे स्वयं द्रौपदी को सुनाया था। मान्यता है कि जिन दंपत्तियों के बीच छोटी छोटी बात को लेकर अनबन रहती है, करवाचौथ व्रत से आपसी मनमुटाव दूर होता है। करवाचौथ में चंद्रमा की पूजा की जाती है। चंद्रमा मन का कारक है। सारे रिश्ते नाते भी इसी मन की डोर से बंधे हैं।

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