इस शहर में दिल का जीना बड़ा मुश्किल यहाँ जख्म देनेवाले सरेआम मिलते हैं

ना होठ खुलते हैं, ना जाम मिलते हैं
इश्क के मयखाने में यही दास्तान मिलते हैं

उन शाखों पे दिल ने आशियां बनाया
जिनपे तिनकों के न कोई मकाँ मिलते हैं

मैं चल पड़ा हूं पगडंडियों पे अकेले
जहाँ ये जमीं न आसमान मिलते हैं

इस शहर में दिल का जीना बड़ा मुश्किल
यहाँ जख्म देनेवाले सरेआम मिलते हैं

एक टिप्पणी भेजें

[blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget