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मंगलवार, 6 अक्तूबर 2015

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इस शहर में दिल का जीना बड़ा मुश्किल यहाँ जख्म देनेवाले सरेआम मिलते हैं

admin - 3:39:00 am

ना होठ खुलते हैं, ना जाम मिलते हैं
इश्क के मयखाने में यही दास्तान मिलते हैं

उन शाखों पे दिल ने आशियां बनाया
जिनपे तिनकों के न कोई मकाँ मिलते हैं

मैं चल पड़ा हूं पगडंडियों पे अकेले
जहाँ ये जमीं न आसमान मिलते हैं

इस शहर में दिल का जीना बड़ा मुश्किल
यहाँ जख्म देनेवाले सरेआम मिलते हैं

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