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महालक्ष्मी व्रत सोमवार 5 अक्टूबर 2015 को है : इस विधि से करें पूजा, प्रसन्न होंगी मां लक्ष्मी maa lakshmi brat

admin - 8:15:00 am

महालक्ष्मी व्रत सोमवार 5 अक्टूबर 2015 को है : इस विधि से करें पूजा, प्रसन्न होंगी मां लक्ष्मी

कई कलेंडर इत्यादि में 4 अक्टूबर रविवार को महा लक्षमी अष्टमी पूजा बतायी जो सही नही है ।।
पंचांग अनुसार सोमवार को अष्टमी श्राद्ध और जीवित पुत्रिका व्रतम है ।।

धर्म शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध पक्ष की अष्टमी तिथि को महालक्ष्मी व्रत किया जाता है। इस दिन महिलाएं हाथी पर विराजित मां लक्ष्मी की पूजा करती हैं। इस बार ये व्रत 5 अक्टूबर 2015 सोमवार को है। इस दिन हाथी पर विराजित माता लक्ष्मी की पूजा इस विधि से करना चाहिए-
शाम के समय शुद्धता पूर्वक घर के देवालय में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर केसर मिले चन्दन से अष्टदल बनाकर व चावल रख जल कलश रखें।
- कलश के पास हल्दी से कमल बनाकर उस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति प्रतिष्ठित करें। मिट्टी का हाथी बाजार से लाकर या घर में बना कर उसे स्वर्णाभूषणों से सजाएं। नया खरीदा सोना हाथी पर रखने से पूजा का विशेष लाभ मिलता है।
- माता लक्ष्मी की मूर्ति के सामने श्रीयंत्र भी रखें। कमल के फूल से पूजन करें। पं विकास दीप शर्मा
सोने-चांदी के सिक्के, मिठाई व फल भी रखें।
- इसके बाद माता लक्ष्मी के आठ रूपों की इन मंत्रों के साथ कुंकुम, चावल और फूल चढ़ाते हुए पूजा करें-
- ऊँ आद्यलक्ष्म्यै नम:
- ऊँ विद्यालक्ष्म्यै नम:
- ऊँ सौभाग्यलक्ष्म्यै नम:
- ऊँ अमृतलक्ष्म्यै नम:
- ऊँ कामलक्ष्म्यै नम:
- ऊँ सत्यलक्ष्म्यै नम:
- ऊँ भोगलक्ष्म्यै नम:
- ऊँ योगलक्ष्म्यै नम:
- इसके बाद धूप और घी के दीप से पूजा कर नैवेद्य या भोग लगाएं व मां महालक्ष्मी की आरती करें।पं विकास दीप शर्मा  मंशापूर्ण ज्योतिष केंद्र न्यू ब्लाक  शिवपुरी 9993462153

कई कलेंडर इत्यादि में 4 अक्टूबर रविवार को महा लक्षमी अष्टमी पूजा बतायी जो सही नही है ।।
पंचांग अनुसार सोमवार को अष्टमी श्राद्ध और जीवित पुत्रिका व्रतम है ।।

धर्म शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध पक्ष की अष्टमी तिथि को महालक्ष्मी व्रत किया जाता है। इस दिन महिलाएं हाथी पर विराजित मां लक्ष्मी की पूजा करती हैं। इस बार ये व्रत 5 अक्टूबर 2015 सोमवार को है। इस दिन हाथी पर विराजित माता लक्ष्मी की पूजा इस विधि से करना चाहिए-
शाम के समय शुद्धता पूर्वक घर के देवालय में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर केसर मिले चन्दन से अष्टदल बनाकर व चावल रख जल कलश रखें।
- कलश के पास हल्दी से कमल बनाकर उस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति प्रतिष्ठित करें। मिट्टी का हाथी बाजार से लाकर या घर में बना कर उसे स्वर्णाभूषणों से सजाएं। नया खरीदा सोना हाथी पर रखने से पूजा का विशेष लाभ मिलता है।
- माता लक्ष्मी की मूर्ति के सामने श्रीयंत्र भी रखें। कमल के फूल से पूजन करें। पं विकास दीप शर्मा
सोने-चांदी के सिक्के, मिठाई व फल भी रखें।
- इसके बाद माता लक्ष्मी के आठ रूपों की इन मंत्रों के साथ कुंकुम, चावल और फूल चढ़ाते हुए पूजा करें-
- ऊँ आद्यलक्ष्म्यै नम:
- ऊँ विद्यालक्ष्म्यै नम:
- ऊँ सौभाग्यलक्ष्म्यै नम:
- ऊँ अमृतलक्ष्म्यै नम:
- ऊँ कामलक्ष्म्यै नम:
- ऊँ सत्यलक्ष्म्यै नम:
- ऊँ भोगलक्ष्म्यै नम:
- ऊँ योगलक्ष्म्यै नम:
- इसके बाद धूप और घी के दीप से पूजा कर नैवेद्य या भोग लगाएं व मां महालक्ष्मी की आरती करें।