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जन्माष्टमी और उपाय (जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ.....) shree krishna janmashtami 2015

11:17:00 am

जन्माष्टमी और उपाय (जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ.....)
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी मे वृषभ राशि, रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण अवतार क्यों लिया, धर्म ग्रंथों के अनुसार इसका कारण इस प्रकार है-
द्वापर युग में जह पृथ्वी पर मानव रूपी राक्षसों के अत्याचार बढऩे लगे। तब पृथ्वी दु:खी होकर भगवान विष्णु के पास गईं। तब भगवान विष्णु ने कहा मैं शीघ्र ही पृथ्वी पर जन्म लेकर दुष्टों का सर्वनाश करूंगा। द्वापर युग के अन्त में मथुरा में उग्रसेन राजा राज्य करते थे। उग्रसेन के पुत्र का नाम कंस था। कंस ने उग्रसेन को बलपूर्वक कारागार में डाल स्वयं राजा बन गया थी।
कंस की बहन देवकी का विवाह यादव कुल में वासुदेव के साथ तय हुआ। जब कंस देवकी को विदा करने के लिए जा रहा था तो आकाशवाणी हुई कि- देवकी का आठवां पुत्र कंस का वध करेगा । यह सुनकर कंस डर गया और उसने देवकी और वासुदेव को कारागार में डाल दिया। और एक-एक कर देवकी की होने वाली संतानों का वध करने लगा।

आठवें गर्भ से श्रीकृष्ण का जन्म हुआ लेकिन माया के प्रभाव से किसी को इस बात का पता नहीं चला कि देवकी की आठवी संतान गोकुल में नंदबाबा के यहां पल रही है। यहां भी श्रीकृष्ण ने अपनी लीला से कई राक्षसों का वध किया और अंत में कंस का वध कर राजा उग्रसेन को सिंहासन पर बैठाया। श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध में पाण्डवों का साथ दिया और अधर्म का नाश कर धर्म रूपी युधिष्ठिर को सिंहासन पर बैठाया।

इस बार ये त्योहार 5 अगस्त शनिवार को है। इस बार कृष्ण जन्माष्टमी को शिक्षक दिवस भी है ।। और गीता उपदेश में कृष्ण से बड़ा कोई शिक्षक नही हुआ ।। हमें शिक्षको का सम्मान करना चाइये ।। क्योंकि वही एक व्यक्ति होता है जो हमको जीवन में अच्छे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है ।।

अगर इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय किए जाएं तो हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

उपाय

1- धनवान :- भगवान श्रीकृष्ण को सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं। इसमें तुलसी के पत्ते अवश्य डालें।

2- मालामाल होना :- इस दिन दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक करें।

3- सुख - शांति :- श्रीकृष्ण मंदिर में जाकर तुलसी की माला से नीचे लिखे मंत्र की 11 माला जप करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण को पीला वस्त्र व तुलसी के पत्ते अर्पित करें. मंत्र - {"क्लीं कृष्णाय वासुदेवाय हरि: परमात्मने प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:"}

4- मां लक्ष्मी की कृपा :- श्रीकृष्ण को पीतांबरधारी भी कहते हैं, जिसका अर्थ है पीले रंग के कपड़े पहनने वाला। इस दिन पीले रंग के कपड़े, पीले फल व पीला अनाज दान करने से प्राप्त होती है।

5- तिजोरी में पैसा :- जन्माष्टमी की करीब 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें तो जीवन में कभी धन की कमी नहीं आती।

6- जेब खाली नहीं होगी :- इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते समय कुछ रुपए इनके पास रख दें। पूजन के बाद ये रूपए अपने पर्स में रख लें।

7- घर के वातावरण के लिए :- जन्माष्टमी को शाम के समय तुलसी को गाय के घी का दीपक लगाएं और "ऊँ वासुदेवाय नम:" मंत्र बोलते हुए तुलसी की 11 परिक्रमा करें।

8- आमदनी या नौकरी :- सात कन्याओं को खीर या सफेद मीठी वस्तु खिलानी चाहिए। फिर पांच शुक्रवार सात कन्याओं को खीर बांटें।

9- कार्य बनाने के लिए :- जन्माष्टमी से शुरू कर, सत्ताइस दिन नारियल, बादाम लगातार मंदिर में चढ़ाये।

10- कर्ज :- श्मशान के कुएं का जल लाकर किसी पीपल वृक्ष पर अर्पित करे। यह उपाय जन्माष्टमी से शुरू करे, फिर नियमित रूप से छह शनिवार यह उपाय करे।

11- अचानक धन लाभ :- शाम के समय पीपल के पास तेल का पंचमुखी दीपक जलाना चाहिए।

12 _ सुंदर संतान :- जन्माष्टमी के दिन सुबह या शाम के समय कुश के आसन पर बैठकर इस मंत्र का जप करें। सामने बालगोपाल की मूर्ति या चित्र अवश्य रखें और मन में बालगोपाल का स्मरण करें। कम से कम 5 माला जप अवश्य करें। मंत्र - {"देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणंगता।।"}

पाप और शोक के दावानल को दग्ध करने हेतु . . भारत की इस पावन धरा पर स्वयं " भगवान विष्णु " अपनी सोलह कलाओं के साथ " भगवान श्रीकृष्ण " के रूप में भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में अवतरित हुए. . . " भगवान श्रीकृष्ण " के प्राकट्य उत्सव के रूप में ही हम इस पावन दिवस को " महापर्व जन्माष्टमी " के रूप में मनाते हैं. . .
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= पौराणिक कथानुसार . जब " भगवान श्रीकृष्ण " का जन्म हुआ उस समय आकाश में घना अन्धकार छाया हुआ था . घनघोर वर्षा हो रही थी, उनके माता-पिता " वासुदेव -देवकी " बेड़ियों में बंधे थे . लेकिन प्रभु की कृपा से बेड़ियों के साथ-साथ कारागार के द्वार स्वयं ही खुल गए . पहरेदार गहरी नींद में सो गए और वसुदेव श्रीकृष्ण को उफनती यमुना के पार गोकुल में अपने मित्र " नन्दगोप " के घर ले गए और नन्द की पत्नी " यशोदा " के गर्भ से उत्पन्न कन्या को लेकर वापस कारागार आ गए . .
नन्दगोपाल के जन्म स्थान मथुरा सहित पुरे भारत वर्ष में यह महापर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है . . .
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= " कृष्ण जन्माष्टमी " के दिन विश्व के कई भागों में मटकी फोड़ने का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है . . जिसकी सुन्दरता और सौम्यता भक्तों के दिलों में भगवान श्रीकृष्ण की यादों को ताज़ा कर देती है. . जन्माष्टमी पर भक्तों को दिन भर उपवास रखना चाहिए और रात्रि के 11 बजे स्नान आदि से पवित्र हो कर घर के एकांत पवित्र कमरे में, पूर्व दिशा की ओर आम लकड़ी के सिंहासन पर, लाल वस्त्र बिछाकर, उसपर राधा-कृष्ण की तस्वीर स्थापित करना चाहिए . इसके बाद शास्त्रानुसार उन्हें विधि पूर्वक " नंदलाल ' की पूजा करना चाहिए. मान्यता है कि इस दिन जो श्रद्धा पूर्वक जन्माष्टमी के महात्म्य को पढ़ता और सुनता है, इस लोक में सारे सुखों को भोगकर वैकुण्ठ धाम को जाता है. . .