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जीना मकसद है जिंदगी का 'रोहित' जीता रह।

admin - 12:13:00 pm

प्यार-मोहबत के  फरिश्तों का हमजबां होना
सब गुनाहो से बुरा है दिल मैं अरमां होना |

अहसास की आँख से देखी हैं रूसवाइयां
महज़ इतफाक नहीं दिल का परेशां होना  |

नजदीकयां भी बुरी होती हैं दूरियों की तरह
जरुरी है  कुछ फासिलों का दरम्यां होना  |

गर गरूर है  उन्हें महलों  का तो रहने दो
मेरे  लिए काफी है  सर पे आसमां होना  |

न जाने क्यों खुदा होना चाहते है लोग
काफी होता है  एक इंसां का इंसां होना  |

जीना मकसद है  जिंदगी  का  'रोहित'  जीता रह
क्यों चाहता है अपने क़दमों के निशां होना |