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हीर-रांझा के प्यार की कहानी- Love story of heer ranjha part-2

12:44:00 pm
हीर रांझा की जंगल में मुलाकात

हीर रांझा के लिए खाना लेकर सियालों के गांव से जंगल की ओर चली। हीर स्वर्ग से उतरी उन सौंदर्य के बादलों की तरह थी जो रेगिस्तान को चंदन के पेड़ों से हरा-भरा कर उसमें खुशबू भर सकती थी। हीर उस रूह की तरह रांझे की ओर जा रही थी जिसको पाकर मृत शरीर जी उठता है।
वह रांझे के पास अपने दिल में उठ रहे इश्क के तूफान को शांत करने के लिए जा रही थी। अब रांझे के प्यार में हीर पूरी तरह कैद हो चुकी थी। वह रांझे के लिए चावल, चीनी, मक्खन और दूध लेकर आई।
रांझा जैसे ही दिखा, उसकी आंखों में आंसू भर आए और वह रोते हुए कहने लगी- मैं तुम्हारी तलाश में पूरे जंगल में भटकती फिरी। हीर ने रांझे को बड़े प्यार से खाना परोसा।
रांझा उससे कहने लगा- मजहब में ऐसा कहा गया है कि औरतों के वादों पर यकीन नहीं करना चाहिए। लेकिन हीर, अगर तुम अपना वादा निभाओगी तो रांझा तुम्हारे लिए नौकर होने का गम भी बर्दाश्त कर जाएगा।
हीर ने जवाब दिया- औरतों की कौम के बारे में ऐसी बातें न करो। औरतों की तरह लगातार अपनी बातों पर दृढ़ रहने वाला और कोई नहीं होता। जोसफ के इश्क में जुलैखा ने अपना साम्राज्य छोड़ दिया। महिवाल के प्यार में सोहनी नदी में डूब गई। लैला की मुहब्बत से सारा जहान वाकिफ है। पुन्नु के प्यार में जलते रेगिस्तान में भटकते हुए सस्सी का दम टूटा। शिरीं अपने आशिक फरहाद के लिए मर गई। पैगंबरों और संतों को औरतें ही तो जन्म देती हैं। क्या आदम और हव्वा एक जैसे नहीं थे?
हीर ने आगे कहा- मर्द औरतों की तरह मजबूत नहीं होते। कवियों से पूछो, वह इस बात को बखूबी जानते हैं। मैं तुमसे वादा करती हूं कि जब तक मेरी नसों में लहू बह रहा है तब तक मैं तुम्हारी गुलाम बनकर रहूंगी। तुम जो कहोगे, वही मैं करूंगी। अगर मुझे बाजार में बेचकर तुमको खुशी मिल सकती हो तो यह भी कर लेना।
इस तरह से हीर मीठी-मीठी बातों से रांझे के सवालों का सामना करती रही और अपना दिल खोलकर उसके सामने रख दिया।
हीर बोली- जब हम दुश्मनों से घिर जाएंगे, तब तुम पूरे धैर्य के साथ जंग लड़ना। प्यार के समंदर में किस्मत की ऐसी जबर्दस्त लहरें हैं जो हमें या तो साहिल तक पहुंचाएंगी या हमें डूबो देंगी। मेरे दुष्ट चाचा कैदु से सावधान रहना। वह शैतान जैसा है। दुनिया हमें अपमानित करेगी। जो हमें नहीं जानते वे भी हमारे ऊपर ताने कसेंगे। लेकिन सच्चे आशिक इन सब बातों से नहीं डरते। वो इश्क में जान तक दे दे देते हैं। प्यार करने वालों का खुदा के अलावा कोई मददगार नहीं होता।
अब हीर रोज खाना लेकर रांझा के पास जंगल में जाने लगी और उसने सच्चे प्रेमी होने की कसम खाई। हीर ने चरखा कातना छोड़ दिया और सखियों के साथ उसका उठना-बैठना भी छूट गया। वह रांझा के साथ दिनभर रहने लगी। रांझे की संगत में उसने खुद को आजाद छोड़ दिया
चरवाहे रांझे के इश्क में हीर के गिरफ्तार होने की खबर गांव में तेजी से फैली। यह भी सभी जान गए कि हीर रोज रांझे से मिलने जाती है। हीर की मां तक बात पहुंची तो वह बहुत गुस्से में आई। कैदु ने भी हीर को जंगल में रांझा के साथ देख लिया।
हीर जंगल से जब वापस लौटी तो मां ने डांटते हुए कहा, ‘गांववालों के ताने सुनकर हम जहर का घूंट पीकर रह गए। तू मेरे कोख से पैदा नहीं होती तो अच्छा होता। अगर तुम अपनी दुष्टता नहीं छोड़ोगी तो पिता चूचक और तुम्हारा भाई सुल्तान तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े कर देंगे।’
हीर ने जवाब दिया, ‘सुनो मां, मेरी सांसें जब तक चल रही हैं, मैं रांझा को नहीं छोड़ सकती। मैं भले ही मार दी जाऊं। इस तरह से मरने के बाद मैं लैला-मजनू जैसे आशिकों से मिल पाऊंगी जो इश्क के खातिर कुर्बान हो गए।’
हीर की बात सुनकर मां का गुस्सा सातवें आसमान पर था। मां ने कहा, ‘अब तक मां-बाप ने तुम पर जो प्यार लुटाया, उसका यह सिला तुम दे रही हो बेटी। हमने सोचा था कि अपनी बगिया में हमने गुलाब का पौधा उगाया है लेकिन तुम तो कांटों की झाड़ निकली। तुम रांझा से रोज मिलने जाती हो और उसके लिए खाना भी ले जाती हो। मां-बाप की हिदायत का तुमने जरा भी ख्याल नहीं रखा। जो बेटियां काबू में नहीं रहती, लोग उनको वेश्या कहते हैं।’
हीर ने अपनी मां को बातों को अनसुना कर दिया और रांझा से मिलने रोज जंगल में जाती रही। इधर लंगड़ा कैदु हीर के पिता चूचक के कान भरता रहा और हीर पर पाबंदी लगाने के लिए उकसाता रहा। वह जंगल में हीर और रांझे पर जासूसों की तरह नजर रखने लगा।
वह छुपकर हीर का पीछा करता। आखिरकार कैदु को अपनी कुटिल योजना को अंजाम देने का मौका मिल गया। हीर रांझे के लिए पानी लाने के लिए नदी की ओर गई। रांझा अकेला बैठा था तभी कैदु फकीर के वेश में उसके पास आया और खुदा का नाम लेकर मांगने लगा। रांझा ने उसे फकीर समझकर आधा खाना उसे दे दिया। कैदु ने फकीरों की तरह उसको दुआ दी और खाना लेकर गांव की ओर चल पड़ा।
जब हीर नदी से पानी लेकर वापस लौटी तो उसने रांझा के पास आधा खाना देख उससे पूछा। रांझा ने बताया कि एक लंगड़ा कर चलने वाला फकीर उसके पास आया था जिसे उसने आधा खाना दे दिया।
हीर सारा माजरा समझ गई। उसने रांझा से कहा, ‘तुम्हारी बुद्धि कहां चली गई है? वह फकीर नहीं मेरा दुष्ट चाचा कैदु था जो मुझे बर्बाद कर देना चाहता है। मैंने तुमको पहले ही सावधान किया था। कैदु शैतान है। वह पति-पत्नियों और मां-बेटियों में फूट पैदा कर देता है। वह बहुत बड़ा पाखंडी है। वह सुबह को अपने दोनों हाथों से जिस चीज को संवारता है, रात को अपनी लात से उसे उजाड़ देता है। वह हमारे प्यार भरी दुनिया में जहर घोल देगा।’
रांझा ने हीर को जवाब दिया, ‘कैदु अभी-अभी यहां से गया है और वह बहुत दूर नहीं गया होगा। जाओ और कुछ भी करके उसे रोको।’
हीर का दिल कैदु के खिलाफ नफरत और गुस्से से भर आया और वह उसे पकड़ने के लिए दौड़ी। वह जल्दी ही कैदु के पास पहुंच गई और बाघिन की तरह उसपर टूट पड़ी। हीर ने कैदु की फकीरी टोपी उतार फेंकी, मनकों की माला तोड़ डाली। हीर कैदु को बेतहाशा पीटने लगी जैसे पत्थर पर धोबी कपड़ा पटकता है।
हीर गुस्से से उबल रही थी। वह कैदु पर चिल्लाते हुए बोली, ‘तू रांझे को धोखा देकर खाना ले आया लेकिन मुझसे कैसे बचेगा। अपनी जान की खैर चाहते हो तो लौटा दे मुझे खाना, नहीं तो तेरे हाथ-पैर बांध कर पेड़ से लटका दूंगी। औरतों से झगड़ा मोल मत लो।’
कैदु हीर से किसी तरह से खुद को बचाता खाना लेकर भागा और सीधे गांव पहुंचा। गांव के बड़े बुजुर्गों की पंचायत में कैदु खाना दिखाकर कहने लगा, ‘देखो, इसे खिलाने हीर रोज रांझा के पास जाती है। क्या अब भी तुमलोग मेरी बात पर यकीन नहीं करोगे। हीर पूरे गांव को बदनाम कर देगी। अरे, कोई उसके बाप चूचक से क्यों नहीं कहता कि बेटी को बांध कर रखो। चूचक को तो उस दिन पर पछतावा करना चाहिए जब उसने इस चरवाहे को काम पर रखा था। क्या उसका दिमाग घास चरने चला गया था।’
कैदु की बात सुनकर पंचायत के लोगों ने जाकर चूचक को सारी बातें बताई। चूचक कैदु को कोसने लगा। ‘कैदु झूठी कहानियां बनाता रहता है। उसके पास करने को और कोई काम नहीं है। दिनभर मक्खियां मारता रहता है। चोगा पहन लेने से क्या वो फकीर हो जाएगा। वह हीर के खिलाफ अपनी जुबान से आग क्यों उगल रहा है। हीर जंगल में अपनी सहेलियों संग खेलने जाती है।’
लेकिन गांव की औरतें चूचक की इस बात का मजाक उड़ाते हुए हीर की मां से कहने लगीं, ‘तुम्हारी बेटी खराब हो रही है। उसकी करतूतों से हम सबका कलेजा जलता है। उसकी बेशरमी की चर्चे पूरे इलाके में हो रहे हैं। अगर हम कुछ कहें तो हम पर वो चिल्लाने लगती है। उसका घमंड तो राजकुमारियों जैसा है। मस्जिद जाने के बहाने वह जंगल जाकर कोई और ही पाठ पढ़ती रहती है। हीर की वजह से हमारी बेटियां भी खराब हो जाएंगी।’
अब कैदु हीर की मां से कहने लगा, ‘भगवान के लिए अपनी बेटी की शादी कर दो। काजी हमेशा कहता रहता है कि इस बहकी हुई लड़की की शादी हो जानी चाहिए थी। नहीं तो फिर उसके टुकड़े-टुकड़े कर दो और गांव को बदनामी से बचाओ।’
लोगों के ताने सुनकर हीर की मां आपा खो बैठी। उसने तुरंत हीर को बुलाने के लिए घर में काम करने वाली मीठी को भेजा। हीर मां के पास हंसते हुए आई और बोली, ‘मां, देखो मैं आ गई।’
हीर की मां गुस्से में बोली, ‘बेशरम लड़की, इस प्रेम कहानी के लिए तो तुमको बहते दरिया में फेंक देना चाहिए। जवान लड़की जो पिता के घर से बाहर कदम रखे उसे कुएं में डुबोकर मार देना चाहिए। तुम अपने प्रेमी के लिए इतनी उतावली हो हीर, अब तुम्हारे लिए पति लाना होगा। अगर तुम्हारे भाई यह जानेंगे कि तुम क्या गुल खिला रही हो तो वो तुम्हारे गला घोंट देंगे या तलवार से काट डालेंगे। अपने परिवार का नाक क्यों कटा रही हो हीर।’
हीर की मां मीठी से बोली, ‘मीठी, हीर के सारे जेवर उतार लो। ऐसी बेटी को जेवर देकर क्या फायदा। यह पूरे झांग सियालों के सम्मान को ठेस लगाने पर तुली है। उस चरवाहे को तो हम आज ही निकाल देंगे।’
मां की बात सुनकर हीर बोली, ‘मां, ये तो खुदा की इनायत है कि उसने तुम्हारे घर ऐसे चरवाहे को भेजा। इस खजाने के लिए तो पूरे समाज को खुदा का शुक्रिया करना चाहिए। हमारे पास तो किस्मत खुद चलकर आया है। तुमलोग मेरे प्यार पर इतना हंगामा क्यों खड़ा कर रहे हो। क्या तुम्हें पता नहीं कि आग, दर्द और प्यार को छिपाकर रखा जाता है।’
हीर ने मां-बाप के सामने रांझा को ठुकराने से इंकार कर दिया। हीर की मां ने पति चूचक से कहा, ‘देखो, तुम्हारी बेटी आज मां-बाप को आंखे दिखा रही है। हमारे सारे रिश्तेदार तो इसी मौके की तलाश में बैठे हैं। वह अब इस बारे में चटखारे लेकर बातें करेंगे और हम पर ताना मारेंगे। इस लड़की ने सियालों की इज्जत को धूल में मिला दिया।’
चूचक गुस्से में बोल पड़ा, ‘दूर ले जाओ इस लड़की को मेरे सामने से। इसे धक्का देकर गांव से बाहर फेंक आओ। यह नफरत के ही लायक है। जनम लेते ही इसको जहर दे देना चाहिए था।
रांझा जब गाय भैंसों को लेकर जंगल से लौटा तो देखा कि चूचक गुस्से में उसकी राह तक रहा था। चूचक ने रांझे को रिश्तेदारों के सामने ही बुरा बुरा कहना शुरू कर दिया। चूचक कहने लगा, ‘गायों को छोड़ दो रांझे और यहां से दूर चले जाओ। तुम्हारे कांड के चर्चे चारों तरफ हो रहे हैं। मैंने तुमको गायों के बीच सांढ़ बनने के लिए नौकर नहीं बनाया था। तुमको गायों को जंगल ले जाने को कहा था और तुम लड़कियों को ले जाने लगे। तुम्हारी वजह से पूरे गांव के ताने हमें सुनने को मिले हैं।’
यह सुनते ही रांझा का मिजाज भी काबू में न रहा। वह भी झल्लाते हुए चूचक से बोला, ‘खुदा करे, चोर-डकैत तुम्हारे गाय बछड़ों को ले जाएं। मैं तुम्हारे गाय भैंसों की देखभाल करता था या लड़कियों की। इतने दिनों से मैं खट रहा हूं और अब तुम बिना पैसा दिए मुझे टरकाना चाहते हो। बनिया की तरह मुझे लूट रहे हो।’
रांझा नौकरी छोड़ चला गया। लेकिन उसके जाते ही चूचक के गाय भैंसो ने खाना पीना छोड़ दिया। उनमें से कुछ जंगल में गायब होने लगे तो कुछ नदीं में डूब गए। चूचक को अब रांझा को निकालने पर पछतावा हो रहा था।
हीर अपनी मां मिल्की से बोली, ‘देखो चरवाहे के जाने के बाद गाय भैंसों की हालत कितनी खराब हो गई। लोग भी कह रहे हैं कि पिताजी ने रांझे के साथ ठीक नहीं किया।’ मिल्की पति चूचक से बोली, ‘लोग हमें पापी समझ रहे हैं। हमने चरवाहे को बिना वेतन दिए भगा दिया। जैसे ही उसने पैसे की बात की थी तुमको दे देना चाहिए था। जाओ उसे खोज लाओ।’
चूचक ने मिल्की से रांझा को मनाने को कहा। बोला ‘उससे कहो कि जब तक हीर की शादी न हो जाए वह हमारे गाय भैंसों की रखवाली करे। उसे मजा लेने के लिए छोड़ दो। किसको क्या पता है कि खुदा को क्या मंजूर है। लेकिन चरवाहे को किसी भी तरह से फिर से काम करने के लिए राजी करो।’
मिल्की हीर संग अब रांझा को तलाशने में लगी। रांझा जैसे ही मिला मिल्की उससे मीठी मीठी बातों से मनाने लगी, ‘चूचक के साथ हुए झगड़े को दिल पर मत लो। पिता और बच्चों में तो इस तरह से छोट मोटे झगड़े होते ही रहते हैं। काम पर लौट जाओ। गाय भैंसों की देखभाल भी करो और  हीर की भी सेवा करो। जबसे तुम गए हो वह हमसे नाराज रहती है। हमारी गाय भैंसे, धन दौलत, हीर, सबपर तुम्हारा हक है।’
हीर ने भी रांझे के पास जाकर कहा, ‘तुम मेरी मां की बात मान लो। अभी मेरी शादी तय नहीं हुई है। कौन जानता है कि कल ऊंट किस करवट बैठे।’
रांझे ने हीर की मां की बात मान ली और फिर से चूचक के यहां काम करने लगा। अब रांझा के लिए जंगल में हीर रोज खाना और शरबत लेकर जाती। इश्क में हीर रांझे पर अपना सबकुछ वार चुकी थी।
एक दिन जब हीर रांझा साथ थे तभी जंगल में पांच पीर फिर दिखाई दिए। रांझा पहले भी उनसे मिल चुका था। पांचों पीर का रांझा ने सर झुकाकर अभिवादन किया। पीर बोले, ‘बच्चों, हमें तुम दोनों को साथ देखकर खुशी मिली। इश्क की दुनिया को कभी मत उजाड़ना। तुम हीर के हो और हीर तुम्हारी है। तुम्हारे इश्क से जमाने में हंगामा खड़ा होगा। लोग ताने देंगे लेकिन उन सबका बहादुरी से सामना करना। खुदा को दिन रात याद करना और इश्क करना कभी मत छोड़ना।