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May, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

OMG !हेलमेट न पहनने पर कार चालक का भी चालान काट दिया

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क्या कार चलाते वक्त भी हेलमेट पहनना जरूरी है?
ज़ाहिर है इस सवाल से आप चौंक गए होंगे, लेकिन
बीते रविवार मेरठ में कुछ ऐसा हुआ जिसे सुनने के बाद
आप शायद हंस पड़ेंगे।
घटना उत्तर प्रदेश के मेरठ की है, जहां बीते रविवार
को शैलैंद्र सिंह नाम के एक शख़्स का चालान इस
बात के लिए काटा गया, क्योंकि कार चलाते वक्त
उन्होंने हेलमेट नहीं पहन रखा था।
दरअसल, 24 मई को शैलेंद्र स्विफ्ट कार से अपने 4 साल
के बच्चे को डॉक्टर के पास ले जा रहे थे। इसी दौरान
ट्रैफिक हवलदार शिवराज सिंह ने उनकी कार को
रोका और गाड़ी के कागज़ात मांगे।
गाड़ी के सारे कागज़ात दिखाने के बावजूद
शिवराज सिंह मानने को तैयार नहीं हुआ और उसने
शैलेंद्र सिंह का चालान काट दिया। लेकिन मजेदार
बात ये है कि चालान में गाड़ी चलाते वक्त हेलमेट न
पहनने का कारण बताया गया।
इस बाबत जब ट्रैफिक हवलदार शिवराज सिंह से पूछ
गया तो उसका कहना था कि शैलेंद्र सिंह गाड़ी
चलाते वक्त फ़ोन पर बात कर रहे थे। लेकिन चालान
काटते वक्त गलती से हेलमेट ना पहनने को वजह बता
दिया गया। वहीं पुलिस के इस रवैये से परेशान होकर
शैलैंद्र सिंह ने SSP डीसी दूबे से मिलकर इस बात की
शिकायत …

छत्तीसगढ़-प्रमुख तथ्य information about chattisgarh

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छत्तीसगढ़-प्रमुख तथ्यराज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत मध्यप्रदेश के पुनर्गठन के जरिए छत्तीसगढ़ एक नवम्बर 2000 को नया राज्य बना।छत्तीसगढ़ राज्य का क्षेत्रफल लगभग एक लाख 35 हजार 361 वर्ग किलोमीटर है। क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का 9वां और जनसंख्या की दृष्टि से 16 वां बड़ा राज्य है। इसके कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 44 प्रतिशत इलाका वनों से परिपूर्ण है। वन क्षेत्रफल के हिसाब से छत्तीसगढ़ देश का तीसरा बड़ा राज्य है।छत्तीसगढ़ की सीमाएं देश के छह राज्यों को स्पर्श करती हैं। इनमें मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, उड़ीसा, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के सरहदी इलाकों में सीमावर्ती राज्यों की सांस्कृतिक विशेषताओं का भी प्रभाव देखा जा सकता है।वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ की कुल जनसंख्या दो करोड़ 55 लाख 40 हजार 196 है। इसमें एक करोड़ 28 लाख 27 हजार 915 पुरूष और एक करोड़ 27 लाख 12 हजार 281 महिलाएं हैं। प्रदेश की ग्रामीण आबादी लगभग एक करोड़ 96 लाख 03 हजार 658 और शहरी आबादी 59 लाख 36 हजार 538 है।छत्तीसगढ़ में जनसंख्या का घनत्व 189 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, जबकि भारत…

क्यों करता है भारतीय समाज बेटियों की इतनी परवाह...

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ज़रूर पढ़ें और सयानी होती बेटियों को भी
पढ़ायें।क्यों करता है भारतीय समाज बेटियों की
इतनी परवाह...एक संत की कथा में एक बालिका खड़ी हो गई।
चेहरे पर झलकता आक्रोश
संत ने पूछा बोलो बेटी क्या बात हैबालिका ने कहा- महाराज हमारे समाज में
लड़कों को हर प्रकार की आजादी होती है।
वह कुछ भी करे, कहीं भी जाए उस पर कोई
खास टोका टाकी नहीं होती।इसके विपरीत लड़कियों को बात बात पर
टोका जाता है। यह मत करो, यहाँ मत जाओ,
घर जल्दी आ जाओ आदि।संत मुस्कुराए और कहा...
बेटी तुमने कभी लोहे की दुकान के बाहर पड़े
लोहे के गार्डर देखे हैं? ये गार्डर सर्दी, गर्मी,
बरसात, रात दिन इसी प्रकार पड़े रहते हैं।इसके बावजूद इनका कुछ नहीं बिगड़ता और
इनकी कीमत पर भी कोई अन्तर नहीं पड़ता।
लड़कों के लिए कुछ इसी प्रकार की सोच है
समाज में।अब तुम चलो एक ज्वेलरी शॉप में। एक बड़ी
तिजोरी, उसमें एक छोटी तिजोरी। उसमें रखी
छोटी सुन्दर सी डिब्बी में रेशम पर नज़ाकत से
रखा चमचमाता हीरा।क्योंकि जौहरी जानता है कि अगर हीरे में
जरा भी खरोंच आ गई तो उसकी कोई कीमत
नहीं रहेगी।समाज में बेटियों की अहमियत भी कुछ इसी
प्रकार की है। पूरे घर को रोशन करती
झिलमिलाते हीरे…

और यूँ शबरी को श्रीराम के आशीर्वाद से मोक्ष मिला

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शबरी को श्रीराम के प्रमुख भक्तों में गिना जाता है। शबरी का वास्तविक नाम 'श्रमणा' था। वह भील समुदाय की 'शबरी' जाति से थीं। शबरी के पिता भीलों के राजा थे। शबरी जब विवाह के योग्य हुई तो उसके पिता ने एक दूसरे भील कुमार से उसका विवाह पक्का कर दिया और धूमधाम से विवाह की तैयारी की जाने लगी। विवाह के दिन सैकड़ों बकरे-भैंसे बलिदान के लिए लाए गए।
बकरे-भैंसे देखकर शबरी ने अपने पिता से पूछा- 'ये सब जानवर यहां क्यों लाए गए हैं?' पिता ने कहा- 'तुम्हारे विवाह के उपलक्ष्य में इन सबकी बलि दी जाएगी।'
यह सुनकर बालिका शबरी को अच्छा नहीं लगा और सोचने लगी यह किस प्रकार का विवाह है, जिसमें इतने निर्दोष प्राणियों का वध किया जाएगा। यह तो पाप कर्म है, इससे तो विवाह न करना ही अच्छा है। ऐसा सोचकर वह रात्रि में उठकर जंगल में भाग जाती है।
दंडकारण्य में वह देखती है कि हजारों ऋषि-मुनि तप कर रहे हैं। बालिका शबरी अशिक्षित थी। वह समझ नहीं पा रही थीं कि किस तरह वह इन ऋषि-मुनियों के बीच यहां जंगल में रहें जबकि मुझे तो भजन, ध्यान आदि कुछ भी नहीं आता।
लेकिन शबरी का हृदय पवित्र था और उसमें प्…

जो इस पवित्र एकादशी का व्रत करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है

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हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष में चौबीस एकादशियां होती हैं। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इस व्रत में भोजन करना और पानी पीना वर्जित है। इसीलिए इसे निर्जला एकादशी कहते हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार इस एकादशी पर व्रत करने से वर्ष भर की एकादशियों का पुण्य मिलता है। इस बार निर्जला एकादशी का व्रत 29 मई, शुक्रवार को है।व्रत विधिनिर्जला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर सर्वप्रथम शेषशायी भगवान विष्णु की पंचोपचार पूजा करें। इसके बाद मन को शांत रखते हुए ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। शाम को पुन: भगवान विष्णु की पूजा करें व रात में भजन कीर्तन करते हुए धरती पर विश्राम करें। दूसरे दिन किसी योग्य ब्राह्मण को आमंत्रित कर उसे भोजन कराएं तथा जल से भरे कलश के ऊपर सफेद वस्त्र ढक कर और उस पर शर्करा (शक्कर) तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें। इसके अलावा यथाशक्ति अन्न, वस्त्र, आसन, जूता, छतरी, पंखा तथा फल आदि का दान करना चाहिए। इसके बाद स्वयं भोजन करें। धर्म ग्रंथों के अनुसार इस दिन विधिपूर्वक जल क…

गंगा दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ happy ganga dashhra

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गंगा दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ
गंगा का पृथ्वी
पर आगमन
सबसे पवित्र नदी गंगा
के पृथ्वी पर आने का
पर्व है- गंगा दशहरा।
मनुष्यों को मुक्ति
देने वाली गंगा नदी
अतुलनीय हैं। संपूर्ण
विश्व में इसे सबसे
पवित्र नदी माना जाता
है। राजा भगीरथ ने इसके
लिए वर्षो तक तपस्या
की थी। ज्येष्ठ शुक्ल
दशमी के दिन गंगा धरती
पर आई। इससे न केवल
सूखा और निर्जीव
क्षेत्र उर्वर बन गया,
बल्कि चारों ओर
हरियाली भी छा गई थी।
गंगा-दशहरा पर्व मनाने
की परंपरा इसी समय से
आरंभ हुई थी। राजा
भगीरथ की गंगा को
पृथ्वी पर लाने की
कोशिशों के कारण इस
नदी का एक नाम
भागीरथी भी है।
गंगा स्नान की
महत्त्वता
भविष्य पुराण में लिखा
हुआ है कि जो मनुष्य
गंगा दशहरा के दिन गंगा
के पानी में खड़ा होकर
दस बार ओम नमो भगवती
हिलि हिलि मिलि
मिलि गंगे मां पावय
पावय स्वाहा स्तोत्र
को पढ़ता है, चाहे वो
दरिद्र हो, असमर्थ हो वह
भी गंगा की पूजा कर
पूर्ण फल को पाता है।
यदि ज्येष्ठ शुक्ल
दशमी के दिन मंगलवार हो
तथा हस्त नक्षत्र तिथि
हो तो यह सब पापों को
हरने वाली होती है। वराह
पुराण में लिखा है कि
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी
बुधवार में हस्त नक्षत्र
में श्रेष्ठ नदी स्…