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चंद्रग्रहण – 4 अप्रेल 2015 ,आप क्या करे , क्या मिलेंगे फल chandra grahan 2015

11:20:00 am
चंद्रग्रहण – 4 अप्रेल 2015 ,आप क्या करे , क्या मिलेंगे फल
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हिंदू नववर्ष नवसंवत के बाद भारत का पहला खग्रास चंद्र ग्रहण चैत्र शुक्ल पूर्णिमा शनिवार दिनांक 4 अप्रेल 2015 को लगभग देश के सभी हिस्सों में ग्रस्तोदय खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा ग्रस्त उदय मतलब जिस समय ग्रहण होगा सूर्यास्त हो चूका होगा और चन्द्र उदय के समय ग्रहण होगा |जबकि खंडग्रास का मतलब है ग्रहण पूर्ण न दिखकर एक भाग में ग्रहण लगा हुआ दिखाई देगा | देश में जिन स्थानों पर चन्द्रोदय शाम 7 बजकर 15 मिनिट बाद होगा वहाँ ग्रहण दिखाई नही देगा क्योकि ग्रहण शाम 7 :15 तक खत्म हो जायेगा |
भारतीय समयनुसार भूमंडल में चन्द्र ग्रहण का स्पर्श मोक्षादि समय निम्नानुसार होगा ...
ग्रहण स्पर्श – दोपहर 3 बजकर 45 मिनिट
समील्लन  -- साय: 5 बजकर 24 मिनिट  
ग्रहण मध्य – साय: 5 बजकर 30मिनिट
उन्नमीलन  —  साय: 5 बजकर 36 मिनिट
मोक्ष (समाप्ति) – साय: 7 बजकर 18 मिनिट
पर्वकाल – 3 घंटा 30 मिनिट
ग्रहण स्पर्श होने से मोक्ष होने तक के समय को पर्वकाल कहा जाता है | अगर हम इंदौर, उज्जैन की बात करे तो इंदौर और उज्जैन में चन्द्रोदय शाम 6 बजकर 38 मिनिट और  6 बजकर 40 मिनिट पर होगा इसलिए इंदौर में शाम 6 बजकर 38 मिनिट और  उज्जैन में 6 बजकर 40 मिनिट ग्रस्तोदित चन्द्रग्रहण दिखाई देगा चूँकि शाम 7 बजकर 15 मिनिट तक ग्रहण  मोक्ष (समाप्ति) का समय है इसलिए करीब 37 मिनिट तक ग्रहण दिखाई देता रहेगा |
कहाँ कहाँ दिखाई देगा ग्रहण – भारत के अलावा ग्रहण मध्य पूर्वी एशिया , चीन ,जापान ,पूर्वी रूस , हिंद प्रशांत महासागर उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप में ग्रहण दिखाई देगा |
सूतक कब और क्या न करे ---  जब ग्रहण होता है तो सूतक पालन का विधान होता है  , शास्त्र अनुसार चंद्रग्रहण होने पर ग्रहण से पूर्व 9 घंटे सूतक माना जाता है | लोगो को चाहिए चंद्रोदय के समय से पूर्व 9 घंटे से सुतक मानना चाहिए जैसे इंदौर में 6 बजकर 38 मिनिट से चंद्रोदय होगा इसलिए सुतक सुबह 9 38 से प्रारंभ हो जायेगा |
1-      सूतक काल में धार्मिकजनों को भोजन , शयन , मैथुन , गीत संगीत  .नृत्य मनोविनोद , मूर्ति स्पर्श आदि सांसारिक सुखो का त्याग करना चाहिए |
2-      गर्भवती स्त्रियों को चाकू , कैंची या नुकीली वस्तुओ से बचना चाहिए सब्जी आदि ना काटे | वृद्ध , बाल ,रोगी और गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण से चार घंटे पूर्व तक सात्विक भोजन करने की अनुमति दी गई है | गर्भवती स्त्री के लिए खास बात है उन्हें ग्रहण नहीं देखने चाहिए, क्योंकि उसके दुष्प्रभाव से गर्भस्थ शिशु अंगहीन होकर विकलांग बन सकता है, गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है मान्यता है कि इसके लिए गर्भवती के उदर भाग में गोबर और तुलसी का लेप लगा दिया जाता है, जिससे कि राहु-केतु उसका स्पर्श न करें  कोई दुष्प्रभाव न पड़े |
3-      चंद्रग्रहण के समय भोजन निषिद्ध माना गया है  शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के दौरान खाद्य पदार्थो जल ,भक्ष्य पदार्थ आदि में सूक्ष्म जीवाणु एकत्रित होकर भोज्य पदार्थो को  दूषित कर देते है जिससे विभिन्न रोग होने की संभावना रहती है  ग्रहण के समय मनुष्य के पेट की पाचन-शक्ति कमजोर हो जाती है, सूतक काल में किया गया भोजन अपच, अजीर्ण जैसी अनेक  शिकायतें पैदा कर शारीरिक या मानसिक हानि पहुँचा सकता है.
4-      ग्रहण के समय इत्र ,खुशबु , तेल लगाना,मालिश या उबटन किया तो व्यक्ति चर्मरोग या कुष्‍ठ रोग हो सकता है  ,ग्रहण के समय निद्रा और आलस्य से रोगी बनाता है , लघुशंका करने से घर में दरिद्रता आती है, मल त्यागने से पेट के रोग होते है |
5-       ग्रहण के दिन फुल- पत्ते, या लकड़ी नहीं तोडना चाहिए |  बाल संवारना और गीले वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिये | दंत धावन न करे अन्यथा मुख में रोग उत्पन्न हो सकते है |
शास्त्रों की माने तो
स्कंद पुराण -- ग्रहण के समय सूतककाल में  अन्न खाने से बारह वर्षो का एकत्र किया हुआ सभी  पुण्य का नाश हो जाता है |
देवी भागवत --  ग्रहण के अवसर पर  भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुतुन्द नामक नरक में वास करता है |
क्या करे ग्रहण के समय  – ग्रहण का समय तांत्रिक और मांत्रिको के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है ये मन्त्र और तंत्र सिद्धियों के लिए सबसे शक्तिशाली अवसर होता है  |
1-      ग्रहण के समय सिद्धि तुरंत मिलती है इसलिए तंत्र मन्त्र सिद्धि की अपेक्षा वाले लोगो को तंत्र ,मन्त्र, सिद्धि के लिए प्रयास करना चाहिए  |
2-       जबकि आमजनो को चाहिए  जिस समय ग्रहण का सूतक प्रारंभ होगा सारे सांसारिक कार्य बंद हो जाते है ऐसे में बिना मूर्ति स्पर्श किये  भगवान का ध्यान .जा़प , भजन और मन्त्र सिद्धि करना चाहिए |
3-      ग्रहण समाप्ति के बाद धार्मिकजनोंको चाहिए गंगा जमुना नर्मदा क्षिप्रा आदि पवित्र नदियों पवित्र सरोवर के जल में जो कपड़े ग्रहण के समय पहने थे उन्ही कपड़ो को पहनकर स्नान करे | स्नान के बाद शुद्ध चंद्रमा के दर्शन करे और पूजा आरती करे पश्चात सात्विक भोजन करे | इन नियमों का पालन जहाँ भी ग्रहण दिखाई देगा वहाँ किया जाना चाहिए ऐसी जगह जहाँ बादल के कारण ग्रहण दिखाई न दे तो भी नियमों का पालन करना चाहिए |
4-       भगवान वेदव्यास के अनुसार , चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म एक लाख गुना और सूर्य ग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है | ग्रहण के समय  गंगा जल पास में होने से ग्रहण का शुभफल एक करोड़ गुणा फलदायी होता है।
देश दुनिया पर ग्रहण का प्रभाव – किसी भी ग्रहण का प्रभाव ग्रहण के दिन से आगामी छह माह तक पड़ता है | मेदिनीय ज्योतिष के अनुसार जानते है क्या होगा ग्रहण का प्रभाव –
हस्त नक्षत्र – चंद्रग्रहण कन्या राशि के हस्त नक्षत्र होने से व्यापारी , मालवाहक ट्रक , सैन्य वाहन ,व्यापारिक वस्तुओ , चना , चावल ,सूत ,  रुई , छिलके वाले धान्य में तेजी के योग बनेंगे | चने और आंवला संग्रहण में लाभ होगा | जबकि शिक्षक और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगो के लिए पीड़ाकारक होगा |
कन्या राशि – चंद्रग्रहण कन्या राशि में होने के कारण कृषक , खेतिहर , स्त्रियों को गर्भपीड़ा जनता में पेट रोग होगे जबकि कवि ,गायक , लेखक ,विद्वजनो के लिए कष्टकारी होगा |
शनिवार को ग्रहणफल – चंद्रग्रहण होने से आगामी दिनों में लोहा , सीमेंट , काला वस्त्र , तिलहनी जिन्सो में तेजी के योग है | चोरों का उपद्रव बढेगा और मंत्रियो को कष्ट होने का योग है |
चैत्रमास ग्रहणफल – चैत्रमास में ग्रहण होने से लेखको , चित्रकारो , कलाकार , फोटोग्राफर , विडियोग्राफर , गृह निर्माण करने वाले , फिल्मो में काम करने वाले , माडलिंग करने वाले और प्रजा को कष्ट का सामना करना पड़ेगा | कही अधिक कही अल्प वर्षा के योग है |
ग्रह स्थिति का फल  – चंद्रग्रहण के समय कन्या राशि में स्थित चन्द्रमा पर सूर्य , बुध और गुरु की दृष्टि होने से शहद , घी , तैल, पीतल , सोना , सोयाबीन, हल्दी , पीले वस्त्र आदि पीली वस्तुओ में तेजी आयेगी साथ ही शासकवर्ग के लिए है लेकिन गुरु की दृष्टि से होने से अशुभफलो में कमी आयेगी |
आपकी राशियों पर ग्रहण का प्रभाव --- चन्द्रग्रहण कन्या राशि के हस्त नक्षत्र में होने से हस्त नक्षत्र , कन्या राशि ,कन्या लग्न और रेवती नक्षत्र मीन राशि मीन लग्न वालो के लिए विशेष अशुभप्रद होगा |
ग्रहण का राशियों पर फल
मेष – आपके लिए शुभफल  , रोग , सुख , व्यापार वृद्धि |
वृषभ – आपके लिए मिश्रित फल , पदप्रतिष्ठा में रुकावट , अपयश |
मिथुन – आपके लिए अशुभ ,अत्यधिक मेहनत से सफलता |
कर्क - आपके लिए शुभफल  . लाभ , आर्थिक पक्ष मजबूत |
सिंह - आपके लिए मिश्रित फल ,हानि ,परिवार में शुभ सन्देश |
कन्या - आपके लिए अशुभफल , पीड़ा ,तनाव |
तुला - आपके लिए अशुभफल  ,व्यय , नकारात्मक विचार , हताशा |
वृश्चिक - आपके लिए शुभफल  , लाभ ,उन्नति
धनु - आपके लिए मिश्रित , क्षति की संभावना |
मकर - आपके लिए मिश्रितफल ,चिंता |
कुम्भ - आपके लिए मिश्रित फल , कष्ट के बाद सुख |
मीन - आपके लिए अशुभफल  , पीड़ा , दाम्पत्य कष्ट |
  ज्योतिर्विद
पं विकास दीप शर्मा
मंशापूर्ण ज्योतिष केंद्र शिवपुरी
9993462153