वर्ष का सर्वोत्तम दिन गुड़ी पड़वा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा happy gudi padwa hindu nav varsh 2015

वर्ष का सर्वोत्तम दिन गुड़ी पड़वा
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा : त्योहारों का संगम



गुड़ीपड़वा का त्योहार

गुड़ी पड़वा विशेष गुड़ी पाड़वा गुड़ी पड़वा

वर्ष प्रतिपदा हिन्दू नववर्ष नववर्ष अभिनंदन

नववर्ष मंगलमय हो नववर्ष की शुरुआत

सृष्टि का जन्मदिवस चैत्र नवरात्रि का आगमन

पौराणिक

कोयल की कुंतर पुकार
बाग-बगीचों में बौराए हैं आम।
हर घर में सजी है गुड़ी
नववर्ष की आई है सुहानी घड़ी

पेड़-पौधे अपने जीर्ण वस्त्रों को त्याग रहे हैं। प्रकृति के
रचयिता अंकुरित-पल्लवित-पुष्पित कर बौराने की ओर ले
जा रहे हैं, मानो पुरातन वस्त्रों को त्याग कर नूतन वस्त्र
धारण कर रहे हैं। पलाश खिल रहे हैं, वृक्ष पुष्पित हो रहे हैं,
आम बौरा रहे हैं, सरसों नृत्य कर रही है, वायु में सुगंध और
मादकता की मस्ती अनुभव हो रही है।
शीत व्यतीत होकर ग्रीष्म के आगमन के साथ मिला-
जुला सुहाना मौसम अनुभव हो रहा है। पुष्पों, फलों से
आच्छादित पेड़-पौधे अभिनन्दन के लिए झुके हुए
प्रसन्नचित्त, मुस्कराते, सुगंध बिखेरते हुए नववर्ष के
आतिथ्य के लिए अपनी तैयारी दिखा रहे हैं।
ND
होली के पश्चात चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को बंसतोत्सव के
रूप में नववर्ष के महोत्सव का आरंभ हो जाता है।
हिन्दू पंचांग के बारह महीनों के क्रम में पहले चैत्र मास के
शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा वर्षभर की सभी तिथियों में
इसलिए सबसे अधिकमहत्व रखती है क्योंकि मान्यता के
अनुसार इसी तिथि पर ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ
की।
इस तिथि को प्रथम स्थान मिला, इसलिए इसे प्रतिपदा
कहा गया है।
जब ब्रह्मा ने सृष्टि का प्रारंभ किया उस समय इसे प्रवरा
तिथि सूचित किया था, जिसका अर्थ है सर्वोत्तम।
इस अर्थ में यह वर्ष का सर्वोत्तम दिन है जो सिखाता है
कि हम अपने जीवन में सभी कामों में, सभी क्षेत्रों में
जो भी कर्म करें, उनमें हमारा स्थान और हमारे कर्म
लोक कल्याण की दृष्टि से श्रेष्ठ स्थान पर रखे जाने
योग्य हों।
इसे संवत्सर प्रतिपदा भी कहते हैं। सिंधी समाज का पर्व
चेटीचंड भी वर्ष प्रतिपदा के अगले दिन शुरू होता है।
शुक्ल पक्ष में चांद अपने पूरे सौन्दर्य के साथ आकाश में
विराजमान होता है। इसलिए चैत्रचंद्र का देशज रूप हुआ
चैतीचांद और फिर सिंधी में हुआ चेटीचंड।
महाराष्ट्र में यह पर्व गुड़ी पाड़वा ( गुढी प
ाड
़व
ा)
के नाम से मनाया जाता है।
वैसे नवसंवत्सर के लिए गुड़ी पड़वा अब समूचे देश में
सामान्य तौर पर जाना जाने लगा है।
महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने प्रतिपादित किया है कि
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से दिन-मास-वर्ष और युगादि का
आरंभ हुआ है।

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