कैसे लोगों को अपने साथ रखें और किन लोगों से दूर रहें

कैसे लोगों को अपने साथ रखें और किन लोगों से दूर रहें:--

कबीर का प्रसिद्ध दोहा है निंदक नियरे राखिए.. इसका अर्थ यह है कि निंदक यानी आलोचना करने वाले लोगों को अपने पास रखना चाहिए। निंदक पास रहेंगे तो हमें अपनी गलतियों की जानकारी मिलती रहती है। ये दोहा पुराना है और उन लोगों के लिए है, जो खुद अपने कामों का विश्लेषण नहीं कर पाते हैं।
आज का प्रबंधन यह सिखाता है कि आलोचकों से दूर रहो, क्योंकि आलोचना करने वाले भी अब बहुत स्वार्थी हो गए हैं। स्वार्थी लोगों के लिए आलोचना एक ऐसा शस्त्र है, जिससे वह आप पर प्रहार करते हैं और आपकी छबि को नुकसान पहुंचाते हैं। स्वार्थी लोगों से तो दूर ही रहना चाहिए, इनकी आलोचना और प्रशंसा, दोनों ही हमारे भविष्य के लिए घातक होती है।

प्रेरक नियरे राखिए :---
कबीर के इस दोहे के उलट किसी संत ने कहा है कि प्रेरक नियरे राखिए.. ऐसे लोगों को अपने पास रखें, जो हमारे लिए प्रेरणा के स्रोत हों। प्रेरणा दो तरीके से मिलती है। पहली, मस्तिष्क से और दूसरी मन से। अच्छी किताबें, अच्छे लोग, गुरुजन, ये आपको मस्तिष्क से प्रेरणा देते हैं। माता-पिता, वृद्धजन और परिवार के लोग, हमें मन से प्रेरणा देते हैं। मस्तिष्क का काम है जानकारी एकत्र करना, उनको व्यवस्थित करना और आगे बढ़ाना।
मन दो हिस्सों में बंटा होता है। एक हिस्से से वह विचारों को ग्रहण करता है और दूसरे हिस्से से वासनाओं को गति प्रदान करता है। हमारे अपने लोग और खासतौर पर माता-पिता जब हमें कोई प्रेरणा या सलाह दे रहे होते हैं, तब उनका मन विचार और वासना, दोनों से शून्य रहता है। इन दोनों भावों के जाते ही प्रेम अपना स्थान बना लेता है। प्रेम से पवित्रता आती है। पवित्रता अपना काम करती है। इस पवित्रता के कारण प्रेरणा बिना कहे भी उनके शरीर के आसपास सकारात्मक ऊर्जा के रूप में आने लगती है। इसे दुआ और आशीर्वाद भी कहा जाता है। जब भी मौका मिले तो अपने प्रेरक लोगों से प्रेरणा लेनी चाहिए और अपने करीबियों को प्रेरणा देनी चाहिए .

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