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Why Lord Shiva called kedarnaath ..क्यों कहलाते हैं भगवान शिव केदारनाथ..

Says
The fate of those who visit Sri Kedarnath
Make it.

हिंदी अनुवाद और छाया चित्र नीचे है
Anyone who bull
Seated in the back of the pattern
Mahadev has seen, he's been blessed!
Mr. Kedarnathka Temple 3593 feet
Made at the height of
A grand and magnificent temple.
How the temple was built at such heights,
Imagine today
Can not!
The temple is on a six feet high Chaukorpletfarm
Remains.
In the main part of the sanctuary around the temple pavilion and encompass the path
's.
Nandi the bull as the vehicle sits outside in the courtyard.
Who made the construction of the temple,
It does not mention any authentic |
Why Lord Shiva Kedarnath called ..
Lord Shiva has many names, including the name Kedarnath
Too. Kedarnath twelve Jyorthylingon
Are known to be in one. They had the time and the name of the Golden Age
Since then, Uttarakhand
From the Himalayas to the holy land of Lord Shiva Kedarnath name
The highest peak is seated.
According to legend, Lord Vishnu described in the Puranas Golden Age male and
As Narayan Avatar
Taken. Present on both sides of the river Alaknanda male and
Narayan, he performed severe penance on mountain
The. He was pleased with the austerities
Lord Shiva appeared. They are the incarnation of Vishnu
Anyone wanting worldly fruit
It was not.
So when you ask God Lord Shiva said, then the Nar and Narayan
That this region
To the residence. She also devotees who come here
Provide liberation from the cycle of life and death.
Nar and Narayan said at the request of Lord Shiva
It will appear Jyorthyling
As Shiva would reincarnate. Its vision is to see Shiva
Will receive a virtue.
Jyorthyling appeared at the request of Nar and Narayan.
Where Shiva manifested Jyorthyling
Dharmpriy the king had been called Kedar. King Kedar
Kedarkhand name of this area
Was called. King Kedar was a devotee of Lord Shiva. King Kedar and
Kedarkhand protector
Jyorthyling appearance of Lord Shiva as the Lord
Called Shiva Kedarnath.
कहते हैं,
किस्मत वालों को ही श्री केदारनाथ के दर्शन
हो पाते हैं।
जिस किसी ने भी बैल
की पीठ के स्वरूप में विराजमान
महादेव का दर्शन कर लिया, वह धन्य हो गया !
श्री केदारनाथका मंदिर 3593फीट
की ऊंचाई पर बना
हुआ एक भव्य एवं विशाल मंदिर है।
इतनी ऊंचाई पर इस मंदिर को कैसे बनाया गया,
इसकी कल्पना आज
भी नहीं की जा सकती है!
यह मंदिर एक छह फीट ऊंचे चौकोरप्लेटफार्म पर
बना हुआ है।
मंदिर में मुख्य भाग मंडप और गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ
है।
बाहर प्रांगण में नंदी बैल वाहन के रूप में विराजमान हैं।
मंदिर का निर्माण किसने कराया,
इसका कोई प्रामाणिक उल्लेख नहीं मिलता है |
Why Lord Shiva called kedarnaath ..
क्यों कहलाते हैं भगवान शिव केदारनाथ..
भगवान शिव के कई नाम हैं, इनमें एक नाम केदारनाथ
भी है। केदारनाथ बारह ज्योर्तिलिंगों
में से एक माने जाते हैं। इनका यह नाम सतयुग के समय पड़ा और
तब से आज तक उत्तराखंड
की पवित्र भूमि पर भगवान शिव केदारनाथ नाम से हिमालय
की ऊंची चोटी पर विराजमान हैं।
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार सतयुग में भगवान विष्णु ने नर और
नारायण के रूप में अवतार
लिया। अलकनंदा नदी के दोनों किनारों पर मौजूद नर और
नारायण पर्वत पर इन्होंने घोर तपस्या
की। इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर
भगवान शिव प्रकट हुए। विष्णु के अवतार होने के कारण इन्हें
किसी सांसारिक फल की चाहत
नहीं थी।
इसलिए जब भगवान शिव ने कहा कि वर मांगो, तब नर और नारायण ने
कहा कि आप इस क्षेत्र
में निवास करें। जो भी भक्त यहां आएं उसे
जीवन मरण के चक्र से मुक्ति प्रदान करें।
नर और नारायण की प्रार्थना पर भगवान शिव ने कहा कि
यहां ज्योर्तिलिंग प्रकट होगा जो
साक्षात शिव रूप होगा। इसके दर्शन करने से शिव दर्शन करने
का पुण्य प्राप्त होगा।
नर और नारायण की प्रार्थना पर ज्योर्तिलिंग प्रकट हुआ।
जहां पर शिव का ज्योर्तिलिंग प्रकट
हुआ वहां केदार नामक धर्मप्रिय राजा का शासन था। राजा केदार के
नाम पर यह क्षेत्र केदारखंड
कहलाता था। राजा केदार भगवान शिव के भक्त थे। राजा केदार और
केदारखंड के रक्षक के
रूप में भगवान शिव का ज्योर्तिलिंग प्रकट होने के कारण भगवान
शिव केदारनाथ कहलाये।


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