Agrasen ji's birth anniversary अग्रसेन जी की जयंती २५ सितम्बर २०१४ दिन गुरूवार पर विशेष

अग्रसेन जी की जयंती २५ सितम्बर २०१४ दिन गुरूवार पर विशेष :-

-रोहित बंसल शिवपुरी

महाराजा अग्रसेन (४२५० BC से ६३७ AD) एक पौराणिक समाजवाद के प्रर्वतक, युग पुरुष, राम राज्य के समर्थक एवं महादानी थे। वे अग्रोहा गणराज्य केमहाराजा थे।

जीवन परिचय :-

धार्मिक मान्यतानुसार इनका जन्म मर्यादा पुरुषोतम भगवान श्रीराम की चौंतीसवी पीढ़ी में सूर्यवशीं क्षत्रिय कुल के महाराजा वल्लभ सेन के घर में द्वापर के अन्तिमकाल और कलियुग के प्रारम्भ में आज से ५१८५ वर्ष पूर्व हुआ था। उनके राज में कोई दुखी या लाचार नहीं था। बचपन से ही वे अपनी प्रजा में बहुत लोकप्रिय थे। वे एक धार्मिक, शांति दूत, प्रजा वत्सल, हिंसा विरोधी, बली प्रथा को बंद करवाने वाले, करुणानिधि, सब जीवों से प्रेम, स्नेह रखने वाले दयालू राजा थे। महाराज अग्रसेन एक क्षत्रिय सूर्यवंशी राजा थे। जिन्होंने प्रजा की भलाई के लिए वणिक धर्म अपना लिया था। इनका जन्म द्वापर युग के अंतिम भाग में महाभारत काल में हुआ था। ये प्रतापनगर के राजा बल्लभ के ज्येष्ठ पुत्र थे।

विवाह :-

समयानुसार युवावस्था में उन्हें राजा नागराज की कन्या राजकुमारी माधवी के स्वयंवर में शामिल होने का न्योता मिला। उस स्वयंवर में दूर-दूर से अनेकों राजा और राजकुमार आए थे। यहां तक कि देवताओं के राजा इंद्र भी राजकुमारी के सौंदर्य के वशीभूत हो वहां पधारे थे। स्वयंवर में राजकुमारी माधवी ने राजकुमार अग्रसेन के गले में जयमाला डाल दी। यह दो अलग-अलग संप्रदायों, जातियों और संस्कृतियों का मेल था। जहां अग्रसेन सूर्यवंशी थे वहीं माधवी नागवंश की कन्या थीं।

इंद्र से टकराव :-

इस विवाह से इंद्र जलन और गुस्से से आपे से बाहर हो गये और उन्होंने प्रतापनगर में वर्षा का होना रोक दिया। चारों ओर त्राहि-त्राही मच गयी। लोग अकाल मृत्यु का ग्रास बनने लगे। तब महाराज अग्रसेन ने इंद्र के विरुद्ध युद्ध छेड दिया। चूंकि अग्रसेन धर्म-युद्ध लड रहे थे तो उनका पलडा भारी था जिसे देख देवताओं ने नारद ऋषि को मध्यस्थ बना दोनों के बीच सुलह करवा दी।

तपस्या :-

कुछ समय बाद महाराज अग्रसेन ने अपने प्रजा-जनों की खुशहाली के लिए काशी नगरी जा शिवजी की घोर तपस्या की, जिससे भगवान शिव ने प्रसन्न हो उन्हें माँ लक्ष्मी की तपस्या करने की सलाह दी। माँ लक्ष्मी ने परोपकार हेतु की गयी तपस्या से खुश हो उन्हें दर्शन दिए और कहा कि अपना एक नया राज्य बनाएं और वैश्य परम्परा के अनुसार अपना व्यवसाय करें तो उन्हें तथा उनके लोगों या अनुयायियों को कभी भी किसी चीज की कमी नहीं होगी।

अग्रोहा राज्य की स्थापना :-

अपने नये राज्य की स्थापना के लिए महाराज अग्रसेन ने अपनी रानी माधवी के साथ सारे भारतवर्ष का भ्रमण किया। इसी दौरान उन्हें एक जगह शेर तथा भेडिये के बच्चे एक साथ खेलते मिले। उन्हें लगा कि यह दैवीय संदेश है जो इस वीरभूमि पर उन्हें राज्य स्थापित करने का संकेत दे रहा है। ॠषि मुनियों और ज्योतिषियों की सलाह पर नये राज्य का नाम अग्रेयगण रखा गया जिसे अग्रोहा नाम से जाना जाता है। वह जगह आज के हरियाणा के हिसार के पास हैं। आज भी यह स्थान अग्रहरि और अग्रवाल समाज के लिए तीर्थ के समान है। यहां महाराज अग्रसेन और माँ लक्ष्मी देवी का भव्य मंदिर है।

!!जय अग्रसेन-जय अग्रोहा! 

Agrasen ji's birth anniversary on Thursday September 25, 2014 special day: -
Maharaja Agrasen (4250 BC to 637 AD), a legendary innovator of socialism, age men, Ram Rajya was a supporter and Mahadani. They were Kemaharaja Agroha Republic.
Life Introduction: -
His rule was not a sad or helpless. Since childhood they were very popular among the people. They have a religious, peace envoy, Vatsal people, anti-violence, sacrifice to close the practice, Karunanidhi, all creatures love, affection, who was a noble king. Maharaja Agrasen was a Suryavanshi Kshatriya. Vnik for the benefit of people who had embraced. His birth in the last part of the Mahabharata, was Dwapara Yuga. These Pratap was the eldest son of King Vallabh.
Marriage: -
Daughter of the King Nagaraj, Princess Madhavi time of puberty Swayamvar was invited to join. The King and Prince Swayamvar came from far and wide. Even Indra, king of the gods, there are also those who were subjugated by the beauty of the princess. Princess Madhavi Prince Agrasen jayamala Swayamvar put around the neck. The two different sects, ethnicities and cultures was mailed. Where were Agrasen Suryavanshi was the daughter of Madhavi Nagavansham.
Indra collisions: -
The Marriage Indra became jealous and angry and out of control than they have Pratap stopped the rain. Trahi-Trahi around ensued. People began to mouthful of premature death. Then Maharaj Agrasen was teasing the war against Indra. Agrasen were fighting the Crusades had the upper hand, which made watching the intermediary between the gods, the sage Narada got reconciliation.
Austerity: -

Agroha established state: -
The establishment of the new state Maharaja Agrasen toured all over India with his queen Madhavi. Meanwhile, the children play with them Bediye a place and met the lion. They thought it a divine message which prompts you to install the Birbhum state is giving them. Rishi munis and on the advice of astrologers Agreygn been named the new state is known Agroha. The place near Hisar in Haryana today. Today, this place is like a pilgrimage for Agrhri and Agarwal community. Maharaj Agrasen and mother Lakshmi Devi temple is here.
!! Jay-Jay Agroha Agrasen!

एक टिप्पणी भेजें

[blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget