18+ अच्छी बातें अजब गज़ब अध्यात्म अनोखा अपना देश अमोल दिल से अरे गजब अरे गज़ब अरे बाप रे आध्यात्म आपकी राशि आयुर्वेद आयूर्वेद आश्चर्यजनक इस्लाम उपाय ओशो कविता कहानिया कुण्डली खरी खरी खान-पान गजब के शोध गरम मसाला गृह योग ग्रन्थ चमत्कार चुटकुले जिंदगी ज्योतिष टॉप 10 टोटके त्यौहार दीपावली दुनिया दो लाइन शायरी धर्म नुख्से पूजा प्रेम प्रसंग प्रेरणास्प्रद कहानिया बास्तु-शास्त्र बॉलीवुड ब्यंग्य मंत्र मजेदार मज़ेदार जानकारी मध्यप्रदेश मनोरंजन महाभारत राजनीति राजस्थान लाइव राम चरित्रमानस राष्ट्रीय ख़बरें रोचक जानकारी वायरल सच वास्तु शास्त्र विदेश शायरी शिवपुरी संभोग से समाधि की और सच का सामना सतर्क सदविचार सामाजिक जानकारी सेक्स ज्ञान सोशल मीडिया स्वास्थ्य हँसना मना है हस्त रेखा ज्ञान हिंदू धर्म की महानता हिन्दुओं के प्राचीन 111 मंदिर हिन्दू त्यौहार हिन्दू ब्रत हीर-रांझा ABOUT SHIVPURI adults ajav gajav ALL DOCTORS amol dil se astrologer astrologer in shivpuri atm in svp ayurved BANK bollywood books Breaking News business CHARTERED ACCOUNTANTS CINEMA cloth store coaching and institute college comedy computer sales and service in shivpuri cricket Departments desh desi nukhse devostional devotional DISTRICT ADMINISTRATION doctors Electronics facebook fastivals Festivals financial food free ka gyaan free stuff Friendship fun gk Gwalior health helpline hindi shayari hindu Hindu Dharm history HOSPITAL Hot HOTELS IN SHIVPURI importent in indian culture INDUSTRY IN SHIVPURI Insurance Company internet cafe Jewellers in shivpuri job in shivpuri jobs and careers jokes kahaniya karera kolaras live Latest GK leak video and mms leak video or mms Love Guru Madhav National Park Shiv Madhav National Park Shivpuri Madhya Pradesh make money online mantra medical store mobile phones mobile shop in shivpuri modi Modi Magic National National News net cafe news offers offers in shivpuri osho Osho English PEOPLE Petrol Pump in shivpuri photo gallery photo post photo studio photos plywood and hardware Politics poll projects Property dealers Restaurant sad shayai sad stories Salute samsung saree house save girl child Schools in Shivpuri sher shayari shivpuri shivpuri city Shivpuri News shivpuri police shivpuri tourism shivpuri train Short News spiritual Stationery and printers stories tantra-mantra Tech News Technology teck news telephone numbers Television temples timepaas TIps n tricks Top 10 totke tourism usefull information vastu shastra waterfalls Website Design Development in Shivpuri whatsaap area wonders world

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा नासिक कोर्ट को दिया गया शपथपत्र

मालेगाव कांड मुसलमानों का
आपसी झगड़े का नतीजा था..

पर हिंदूविरोधी कांग्रेस सरकार ने
वोट बैंक की गंदी राजनीति खेली
पकड़े गए सभी मुसलमानों को पुलिस
ने छोड़ दिया और एक निर्दोष साध्वी
प्रज्ञा ठाकुर को फंसा कर अमानवीय अत्याचारों की सारी सीमाँए लाँघ दी।

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एक साध्वी को हिन्दू होने की सजा और कितनी देर
तक||

बहन प्रज्ञा की सचाई अवश्य पढ़े |

मैं साध्वी प्रज्ञा चंद्रपाल सिंह ठाकुर, उम्र-38 साल,
पेशा-कुछ नहीं, 7 गंगा सागर ...अपार्टमेन्ट, कटोदरा,
सूरत,गुजरात राज्य की निवासी हूं जबकि मैं मूलतः मध्य
प्रदेश की निवासिनी हूं. कुछ साल पहले हमारे
अभिभावक सूरत आकर बस गये. पिछले कुछ सालों से मैं
अनुभव कर रही हूं कि भौतिक जगत से मेरा कटाव
होता जा रहा है. आध्यात्मिक जगत लगातार मुझे
अपनी ओर आकर्षित कर रहा था. इसके कारण मैंने
भौतिक जगत को अलविदा करने का निश्चय कर
लिया और 30-01-2007 को संन्यासिन हो गयी.
जब से सन्यासिन हुई हूं मैं अपने जबलपुर वाले आश्रम से
निवास कर रही हूं.

आश्रम में मेरा अधिकांश समय
ध्यान-साधना, योग, प्राणायम और आध्यात्मिक
अध्ययन में ही बीतता था.

आश्रम में
टीवी इत्यादि देखने की मेरी कोई आदत नहीं है,
यहां तक कि आश्रम में अखबार की कोई समुचित
व्यवस्था भी नहीं है. आश्रम में रहने के दिनों को छोड़ दें
तो बाकी समय मैं उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्सों में
धार्मिक प्रवचन और अन्य धार्मिक कार्यों को संपन्न
कराने के लिए उत्तर भारत में यात्राएं करती हूं.
23-9-2008 से 4-10-2008 के दौरान मैं इंदौर में
थी और यहां मैं अपने एक शिष्य अण्णाजी के घर
रूकी थी. 4 अक्टूबर की शाम को मैं अपने आश्रम
जबलपुर वापस आ गयी.

7-10-2008 को जब मैं अपने जबलपुर के आश्रम में
थी तो शाम को महाराष्ट्र से एटीएस के एक पुलिस
अधिकारी का फोन मेरे पास आया जिन्होंने अपना नाम
सावंत बताया. वे मेरी एलएमएल फ्रीडम बाईक के बारे
में जानना चाहते थे. मैंने उनसे कहा कि वह बाईक
तो मैंने बहुत पहले बेच दी है.

अब मेरा उस बाईक से कोई
नाता नहीं है. फिर भी उन्होंने मुझे कहा कि अगर मैं सूरत
आ जाऊं तो वे मुझसे कुछ पूछताछ करना चाहते हैं.

मेरे
लिए तुरंत आश्रम छोड़कर सूरत जाना संभव
नहीं था इसलिए मैंने उन्हें कहा कि हो सके तो आप
ही जबलपुर आश्रम आ जाईये, आपको जो कुछ पूछताछ
करनी है कर लीजिए.

लेकिन उन्होंने जबलपुर आने से
मना कर दिया और कहा कि जितनी जल्दी हो आप सूरत
आ जाईये. फिर मैंने ही सूरत जाने का निश्चय किया और
ट्रेन से उज्जैन के रास्ते 10-10-2008 को सुबह सूरत
पहुंच गयी.

रेलवे स्टेशन पर भीमाभाई पसरीचा मुझे लेने
आये थे. उनके साथ मैं उनके निवासस्थान एटाप नगर
चली गयी.

यहीं पर सुबह के कोई 10 बजे मेरी सावंत से मुलाकात
हुई जो एलएमएल बाईक की खोज करते हुए पहले से
ही सूरत में थे. सावंत से मैंने पूछा कि मेरी बाईक के साथ
क्या हुआ और उस बाईक के बारे में आप पडताल
क्यों कर रहे हैं?

श्रीमान सावंत ने मुझे बताया कि पिछले
सप्ताह सितंबर में मालेगांव में जो विस्फोट हुआ है उसमें
वही बाईक इस्तेमाल की गयी है. यह मेरे लिए
भी बिल्कुल नयी जानकारी थी कि मेरी बाईक
का इस्तेमाल मालेगांव धमाकों में किया गया है. यह
सुनकर मैं सन्न रह गयी. मैंने सावंत को कहा कि आप
जिस एलएमएल फ्रीडम बाईक की बात कर रहे हैं
उसका रंग और नंबर वही है जिसे मैंने कुछ साल पहले बेच
दिया था.

सूरत में सावंत से बातचीत में ही मैंने उन्हें
बता दिया था कि वह एलएमएल फ्रीडम बाईक मैंने
अक्टूबर 2004 में ही मध्यप्रदेश के श्रीमान
जोशी को 24 हजार में बेच दी थी. उसी महीने में मैंने
आरटीओ के तहत जरूरी कागजात (टीटी फार्म) पर
हस्ताक्षर करके बाईक की लेन-देन पूरी कर दी थी. मैंने
साफ तौर पर सावंत को कह दिया था कि अक्टूबर 2004
के बाद से मेरा उस बाईक पर कोई अधिकार नहीं रह
गया था. उसका कौन इस्तेमाल कर रहा है इससे
भी मेरा कोई मतलब नहीं था. लेकिन सावंत ने
कहा कि वे मेरी बात पर विश्वास नहीं कर सकते. इसलिए
मुझे उनके साथ मुंबई जाना पड़ेगा ताकि वे और एटीएस
के उनके अन्य साथी इस बारे में और पूछताछ कर सकें.

पूछताछ के बाद मैं आश्रम आने के लिए आजाद हूं.
यहां यह ध्यान देने की बात है कि सीधे तौर पर मुझे
10-10-2008 को गिरफ्तार नहीं किया गया. मुंबई में
पूछताछ के लिए ले जाने की बाबत मुझे कोई सम्मन
भी नहीं दिया गया.

जबकि मैं चाहती तो मैं सावंत
को अपने आश्रम ही आकर पूछताछ करने के लिए मजबूर
कर सकती थी क्योंकि एक नागरिक के नाते यह
मेरा अधिकार है. लेकिन मैंने सावंत पर विश्वास
किया और उनके साथ बातचीत के दौरान मैंने कुछ
नहीं छिपाया. मैं सावंत के साथ मुंबई जाने के लिए तैयार
हो गयी. सावंत ने कहा कि मैं अपने पिता से भी कहूं
कि वे मेरे साथ मुंबई चलें. मैंने सावंत से
कहा कि उनकी बढ़ती उम्र को देखते हुए उनको साथ
लेकर चलना ठीक नहीं होगा.

इसकी बजाय मैंने
भीमाभाई को साथ लेकर चलने के लिए कहा जिनके घर
में एटीएस मुझसे पूछताछ कर रही थी.
शाम को 5.15 मिनट पर मैं, सावंत और भीमाभाई सूरत
से मुंबई के लिए चल पड़े. 10 अक्टूबर को ही देर रात हम
लोग मुंबई पहुंच गये.

मुझे सीधे कालाचौकी स्थित
एटीएस के आफिस ले जाया गया था. इसके बाद अगले
दो दिनों तक एटीएस की टीम मुझ?से पूछताछ
करती रही. उनके सारे सवाल 29-9-2008 को मालेगांव
में हुए विस्फोट के इर्द-गिर्द ही घूम रहे थे.
मैं उनके हर
सवाल का सही और सीधा जवाब दे रही थी.
अक्टूबर को एटीएस ने अपनी पूछताछ का रास्ता बदल
दिया. अब उसने उग्र होकर पूछताछ करना शुरू किया.
पहले उन्होंने मेरे शिष्य भीमाभाई पसरीचा (जिन्हें मैं
सूरत से अपने साथ लाई थी) से कहा कि वह मुझे बेल्ट
और डंडे से मेरी हथेलियों, माथे और तलुओं पर प्रहार करे.
जब पसरीचा ने ऐसा करने से मना किया तो एटीएस ने
पहले उसको मारा-पीटा. आखिरकार वह एटीएस के
कहने पर मेरे ऊपर प्रहार करने लगा. कुछ भी हो, वह
मेरा शिष्य है और कोई शिष्य अपने गुरू को चोट
नहीं पहुंचा सकता. इसलिए प्रहार करते वक्त भी वह इस
बात का ध्यान रख रहा था कि मुझे कोई चोट न लग
जाए. इसके बाद खानविलकर ने उसको किनारे धकेल
दिया और बेल्ट से खुद मेरे हाथों, हथेलियों, पैरों, तलुओं
पर प्रहार करने लगा. मेरे शरीर के हिस्सों में
अभी भी सूजन मौजूद है.
13 तारीख तक मेरे साथ सुबह, दोपहर और रात में
भी मारपीट की गयी. दो बार ऐसा हुआ कि भोर में चार
बजे मुझे जगाकर मालेगांव विस्फोट के बारे में मुझसे
पूछताछ की गयी. भोर में पूछताछ के दौरान एक
मूछवाले आदमी ने मेरे साथ मारपीट की जिसे मैं
अभी भी पहचान सकती हूं. इस दौरान एटीएस के
लोगों ने मेरे साथ बातचीत में बहुत
भद्दी भाषा का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. मेरे गुरू
का अपमान किया गया और मेरी पवित्रता पर सवाल
किये गये. मुझे इतना परेशान किया गया कि मुझे
लगा कि मेरे सामने आत्महत्या करने के अलावा अब
कोई रास्ता नहीं बचा है.
14 अक्टूबर को सुबह मुझे कुछ जांच के लिए एटीएस
कार्यालय से काफी दूर ले जाया गया जहां से दोपहर
में मेरी वापसी हुई. उस दिन मेरी पसरीचा से कोई
मुलाकात नहीं हुई. मुझे यह भी पता नहीं था कि वे
(पसरीचा) कहां है. 15 अक्टूबर को दोपहर बाद मुझे
और पसरीचा को एटीएस के वाहनों में नागपाड़ा स्थित
राजदूत होटल ले जाया गया जहां कमरा नंबर 315 और
314 में हमे क्रमशः बंद कर दिया गया. यहां होटल में
हमने कोई पैसा जमा नहीं कराया और न ही यहां ठहरने
के लिए कोई खानापूर्ति की. सारा काम एटीएस के
लोगों ने ही किया.
मुझे होटल में रखने के बाद एटीएस के लोगों ने मुझे एक
मोबाईल फोन दिया. एटीएस ने मुझे इसी फोन से अपने
कुछ रिश्तेदारों और शिष्यों (जिसमें मेरी एक
महिला शिष्य भी शामिल थी) को फोन करने के लिए
कहा और कहा कि मैं फोन करके लोगों को बताऊं कि मैं
एक होटल में रूकी हूं और सकुशल हूं. मैंने उनसे पहली बार
यह पूछा कि आप मुझसे यह सब क्यों कहलाना चाह रहे
हैं. समय आनेपर मैं उस महिला शिष्य का नाम
भी सार्वजनिक कर दूंगी.
एटीएस की इस प्रताड़ना के बाद मेरे पेट और किडनी में
दर्द शुरू हो गया. मुझे भूख लगनी बंद हो गयी.
मेरी हालत बिगड़ रही थी. होटल राजदूत में लाने के कुछ
ही घण्टे बाद मुझे एक अस्पताल में
भर्ती करा दिया गया जिसका नाम सुश्रुसा हास्पिटल
था. मुझे आईसीयू में रखा गया. इसके आधे घण्टे के अंदर
ही भीमाभाई पसरीचा भी अस्पताल में लाये गये और
मेरे लिए जो कुछ जरूरी कागजी कार्यवाही थी वह
एटीएस ने भीमाभाई से पूरी करवाई.
जैसा कि भीमाभाई ने मुझे बताया कि श्रीमान
खानविलकर ने हास्पिटल में पैसे जमा करवाये. इसके बाद
पसरीचा को एटीएस वहां से लेकर चली गयी जिसके बाद
से मेरा उनसे किसी प्रकार का कोई संपर्क
नहीं हो पाया है.
इस अस्पताल में कोई 3-4 दिन मेरा इलाज किया गया.
यहां मेरी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा था तो मुझे
यहां से एक अन्य अस्पताल में ले
जाया गया जिसका नाम मुझे याद नहीं है. यह एक
ऊंची ईमारत वाला अस्पताल था जहां दो-तीन दिन
मेरा ईलाज किया गया. इस दौरान मेरे साथ कोई
महिला पुलिसकर्मी नहीं रखी गयी. न ही होटल राजदूत
में और न ही इन दोनो अस्पतालों में. होटल राजदूत और
दोनों अस्पताल में मुझे स्ट्रेचर पर लाया गया, इस
दौरान मेरे चेहरे को एक काले कपड़े से ढंककर रखा गया.
दूसरे अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मुझे फिर एटीएस
के आफिस कालाचौकी लाया गया.
इसके बाद 23-10-2008 को मुझे गिरफ्तार किया गया.
गिरफ्तारी के अगले दिन 24-10-2008 को मुझे मुख्य
न्यायिक मजिस्ट्रेट, नासिक की कोर्ट में प्रस्तुत
किया गया जहां मुझे 3-11-2008 तक पुलिस कस्टडी में
रखने का आदेश हुआ. 24 तारीख तक मुझे वकील
तो छोड़िये अपने परिवारवालों से भी मिलने की इजाजत
नहीं दी गयी. मुझे बिना कानूनी रूप से गिरफ्तार किये
ही 23-10-2008 के पहले ही पालीग्रैफिक टेस्ट
किया गया. इसके बाद 1-11-2008
को दूसरा पालिग्राफिक टेस्ट किया गया. इसी के साथ
मेरा नार्को टेस्ट भी किया गया.
मैं कहना चाहती हूं कि मेरा लाई डिटेक्टर टेस्ट और
नार्को एनेल्सिस टेस्ट बिना मेरी अनुमति के किये गये.
सभी परीक्षणों के बाद भी मालेगांव विस्फोट में मेरे
शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिल रहा था.
आखिरकार 2 नवंबर को मुझे मेरी बहन प्रतिभा भगवान
झा से मिलने की इजाजत दी गयी. मेरी बहन अपने साथ
वकालतनामा लेकर आयी थी जो उसने और उसके पति ने
वकील गणेश सोवानी से तैयार करवाया था. हम लोग
कोई निजी बातचीत नहीं कर पाये क्योंकि एटीएस
को लोग मेरी बातचीत सुन रहे थे. आखिरकार 3 नवंबर
को ही सम्माननीय अदालत के कोर्ट रूम में मैं चार-पांच
मिनट के लिए अपने वकील गणेश सोवानी से मिल पायी.
10 अक्टूबर के बाद से लगातार मेरे साथ जो कुछ
किया गया उसे अपने वकील को मैं चार-पांच मिनट में
ही कैसे बता पाती? इसलिए हाथ से लिखकर माननीय
अदालत को मेरा जो बयान दिया था उसमें विस्तार से
पूरी बात नहीं आ सकी. इसके बाद 11 नवंबर
को भायखला जेल में एक महिला कांस्टेबल
की मौजूदगी में मुझे अपने वकील गणेश सोवानी से एक
बार फिर 4-5 मिनट के लिए मिलने का मौका दिया गया.
इसके अगले दिन 13 नवंबर को मुझे फिर से 8-10 मिनट के
लिए वकील से मिलने की इजाजत दी गयी. इसके बाद
शुक्रवार 14 नवंबर को शाम 4.30 मिनट पर मुझे मेरे
वकील से बात करने के लिए 20 मिनट का वक्त
दिया गया जिसमें मैंने अपने साथ हुई सारी घटनाएं
सिलसिलेवार उन्हें बताई, जिसे यहां प्रस्तुत किया गया है.
(मालेगांव बमकांड के संदेह में गिरफ्तार
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा नासिक कोर्ट में दिये
गये शपथपत्र पर आधारित.)
कृपया इसे व्यापक स्तर पर शेयर करें और लोगों तक
पंहुचाएं जिससे की साध्वी प्रज्ञा के लिए न्याय
की आशा अत्यधिक बलवती हो ...
.जय श्री राम , वन्दे मातरम

Malegav scandal Muslims
Was the result of infighting
Hinduvirodhi on Congress Government
Dirty vote bank politics played
Police caught all Muslims
The left and a flawless saint
Pragya Thakur by trapping the inhuman atrocities crossed all the limits.
Please share this post to all groups
: Crime of being a Hindu Sadhvi and how long
Be sure to read the truth || Sister Wisdom |
I Chanderpaul Sadhvi Pragya Singh Thakur, -38 years of age;
Nothing profession-7 ... Ganga Sagar Apartment, Ktodra,
Surat, Gujarat state while I am a resident originally Central
I am a resident of the state. A few years ago our
Parents settled in Surat. The last few years I
I'm experiencing erosion of the material world
Is becoming. I'm constantly spiritual world
Was attracting. The reason I
Physical world to resolve to quit
Ascetic and was taken to 30-01-2007.
I am in the nun from his ashram in Jabalpur
'm Residence. Most of my time at the ashram
Meditating, yoga, and spiritual Pranaym
The study was spent. Ashram
I have a habit of watching TV, etc.,
Even a proper ashram newspaper
System is not. Leave the days of living in the Ashram
The rest then in most parts of North India
Religious discourse and religious affairs
Do to make trips in the north.
During 4-10-2008 to 23-9-2008 I in Indore
I was a pupil here Anhnaji home
Was stopped. My hermitage on the evening of October 4
Jabalpur back.
7-10-2008 when I ashram in Jabalpur
So the evening was from Maharashtra Police ATS
Officer who came to me call your name
Sawant said. They are about my LML Freedom bike
Wanted to know. I told him that he's Bike
So I have long ago sold. Now I do with that bike
Is not related. They asked me if I still Surat
Some would like to inquire if they'll come to me. My
Surat ashram immediately, except for possible
So I told them that if it was not possible
Come on the Jabalpur Ashram, whatever inquiries you
Collect want. But he came Jabalpur
Refused and said that as soon as you face
Come on. Then I decided to go to Surat
Surat 10-10-2008 morning by train via Ujjain
Reached. Take me to the railway station Bimabai Pasricha
Had come. With them I Attap their city dwelling
Left.
This morning at an 10 am meeting my Sawant
LML bikes which were previously discovered by
Were in the same case. With my bike I asked Sawant
And what about the bike that you conduct
Why? Mr Sawant told me last
The blast happened in Malegaon in September the week
The bike has been used. For me
New information that was exactly my bike
Malegaon blasts were used. This
I was stunned to hear. I said you Sawant
're Referring to the LML Freedom bike
It is the same color and number, which I sold a few years ago
Was given.
I had them in conversation Sawant in Surat
I was told that the LML Freedom bike
Mr. Madhya Pradesh in October 2004
Joshi had sold 24 thousand. In the same month, I
Documents required under the RTO (TT form) on
The transaction was completed by the signature of the bike. I
Sawant had made it clear that in October 2004
Since I no longer have any right on the bike
Had gone. His Who's using it
I did not even make any sense. But Sawant
That they can not trust me. So
I will go with them so they ATS Mumbai
To inquire about this and his other companions.
I am free to come to the ashram after questioning.
It is here that direct attention to me
10-10-2008 was not arrested. In Mumbai
I carry a summons for questioning in respect of
Was not given. While I wished I Sawant
Forced to come to his ashram to inquire
As a citizen because it could
I have a right. But I believe Sawant
And interacting with them, I have some
Not hidden. I prepared to go to Mumbai with Savant
Delusional. Sawant said that I should say to his father
They go with me to Mumbai. I Sawant
Given his increasing age with them
The walk will be fine. Instead, I
Bimabai asked for inclusive whose home
ATS was questioning me.
At 5:15 minutes in the evening I Sawant and Bimabai Surat
Walked to Mumbai. We have late nights on October 10
People reached Mumbai. I located directly Kalachauki
ATS office was moved. The next
Me two days of ATS team? Inquiry
Continued. Malegaon to their many questions 29-9-2008
Blasts were wandering around. I have them all
And giving a direct answer to the question was correct.
On October ATS changed his way of questioning
Given. Now furious when he began making inquiries.
First, he is my disciple Bimabai Pasricha (whom I
Surat had brought along) told me the belt
And stick my palms, forehead and Tluon to poke at.
Pasricha refused to do so by the ATS
Previously beaten him. After the ATS
Spurred began to hit me. However, he
My disciple to his guru and a disciple of injury
Can not deliver. So when he hit the
Keep in mind that I was going to injure
Said. Khanvilkar then pushed him aside
And the belt itself from my hands, palms, feet, Tluon
Began to hit. In parts of my body
Inflammation is still present.
13 date with me morning, noon and night
Was also beaten. It happened twice in the morning four
Pm me about the Malegaon blast me awake
Was questioned. During interrogation at dawn
Mucwale man assaulted me whom I
I can still recognize. The ATS
People interact with me too
Started using abusive language. My Guru
Was insulted and questioned my purity
Were. I was so upset that I
Also thought of committing suicide in front of me now
There is no way.
For me some of the morning on October 14 ATS
Moved far away from the office where the afternoon
In my return. The day of my Pasricha
Was not met. I did not even know that they
(Pasricha) where. October 15 afternoon, I
Pasricha and the ATS at Nagpada in vehicles
Moved to the Ambassador Hotel where room number 315 and
We were stopped at 314, respectively. On site
We did not collect any money nor stay here
Of a formality. ATS work
People only.
After placing people at ATS me me
The mobile phone. Corresponding call me from ATS
Some relatives and disciples (including my one
There was a female disciple) to call
Said and that I tell people that I call
I am stuck in a hotel safe. I did them for the first time
It asked me why you want to be called
's. I named the female pupil at the coming time
I will make it public.
ATS after the torture in my stomach and kidney
The pain has begun. I stopped to catch hungry.
My condition was deteriorating. Hotel Ambassador bring some
Only in a hospital hours later I
Was admitted whose name Susrusa Hospital
Said. I was put in ICU. Within half an hour
Pasricha Bimabai made to the hospital and
For me that whatever was necessary paperwork
Bimabai entirely made from ATS.
As Bimabai told me that Mr.
At the hospital, a sum of money deposited Khanvilkar. Next
Pasricha went from there, after which the ATS
From my contact with them in any way
Has not.
I was treated in hospital for 3-4 days.
There was no improvement in my situation so I
It took another hospital
Moved whose name I do not remember. This is a
Tallest building was a hospital where two or three days
I was cured. During this time with me
There was a woman policeman. Nor Ambassador Hotel
Nor in the two hospitals. Hotel Ambassador and
I was brought into the hospital on a stretcher, the
Was covered with a black cloth over my face.
After being discharged from another hospital ATS Me Again
Kalachauki was brought to the office.
23-10-2008 After that I was arrested.
24-10-2008 arrest me the next day the
Judicial Magistrate, Nashik presented in Court
Where was I 3-11-2008 police custody
Order to keep up. By the 24th I advocate
So leave allowed to meet with his family
Were not. I legally detained without
Paligrafik before the Test 23-10-2008
Been. Then 1-11-2008
The second test was Paligrafik. With this
I was narco test.
I want to say that my lie-detector test and
Anelsis narco test done without my permission.
Me in anything after all tests
Did not find any evidence of involvement.
Finally, on November 2 talents God my sister
Jha was allowed to meet. With my sister
She and her husband had come, with power of attorney
Ganesh had commissioned from sowani lawyer. We people
ATS could not because of a personal conversation
People were listening to my conversation. After November 3
I have only four or five honorable court in the court room
Minutes to get from your lawyer has sowani Ganesh.
Whatever with me since October 10
I was four or five minutes to his lawyer
How could it tell? So the handwritten honorable
Detail in my statement to the court which
The whole thing could not come. Subsequently, November 11
A female constable in the prison Baykla
One from me in the presence of his lawyer Ganesh sowani
Were given the chance to meet again for 4-5 minutes.
The next day I again 8-10 minutes on November 13
Given permission to meet with the lawyer. Next
On Friday, November 14th at 4.30 minutes my
Time of 20 minutes to talk to a lawyer
Been many instances in which I had with
Sequent told them, which is presented here.
(Malegaon blasts arrested on suspicion of
Given in court by Sadhvi Pragya Singh Thakur Nashik
Based on the affidavit.)
Please share it on a large scale and people
Sadhvi of the Justice for Panhuchaan
Expected to be highly potent ...

jay Shri Ram, Vande Mataram

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