Devgarh- devo ki bhumi lalitpur up|देवगढ - देवो की भूमि, ललितपुर उप्र | News | wonders | temples | oshovani | do line shayari

Mobile Menu

ads

More News

Devgarh- devo ki bhumi lalitpur up|देवगढ - देवो की भूमि, ललितपुर उप्र

12:12:00 am


Deoghar, District Lalitpur (Uttar Pradesh) in Lalitpur 32

Miles

Right bank of river Betwa Green -

It is located between picturesque valleys filled | naturally

The place is beautiful, making it more beautiful credited

Here is the rich art | this location 7

Century, ranging from 1 to 7

By century sculpture and construction

Been the main focus of art | Just like Nalanda Education

Was famous for, Deoghar art (particularly sculpture building

Art and architecture) was a major center | Gupta dynasty, Chandel dynasty,

Tomar dynasty, kings Portal ancestry and descent Chauhan

This place has always

Protected and

Contributed to its enrichment | Here is why

Pilgrim's love of art and the art world of our ancestors

Sharda made at this location across from our mind itself

Arises |

The main attraction is Fort Deoghar

Which is on the hill | independent of the Jain religion 41

Temple |

Some incarnations of Vishnu on the hill affiliate Gufaye

Also | Deoghar temple Gupta dashavtar

Pride of India's oldest surviving

One of temples | although it is in a dilapidated state, but

The importance of art here

Is not

Also in the museum and archaeological importance Murtia

Objects of the |

Perhaps the Jain and Hindu deities mentioned in

No

The statue would not be here

Ho | The location of the statue Experiments in Art

Many such images, which in the world and

Get nowhere | Deoghar

On the art of so many intellectuals

Which also has its own Research

Including many overseas | Shantinath here

Seeing the temple of Khajuraho temple and dashavtar

Temples are missing virtually the

Were made later | but in both places

Has its own characteristics | Many Smantaye

Many have Asmantaye |

Khajuraho sculpture is mundane

The sculpture and the spiritual

Unique |

Nagshayi Vishnu, Tirthankar Neminath

Praising Krishna and Balram, twenty-three Parsvnath,

Tirthankar mother Trishala and twenty-three,

Goddess Ambika baby milk as yakshis

Was nursing,

Chakreshvari goddess and demigod Gaumukh

The sculptures, Tirthankar Adinath

Containing statues of coir, instructors and

Murtia of Upadyayon, unique Manstnb,

Walls

Many of the statues were excavated collection etc.

Such a mere idols and Rcnaie

It has been found |

Temple No. 30, which is dedicated to Tirthankar Shantinath

Extremely Atisykari, important, big and famous

Is |

Overall the Deoghar land of the Devo says no

No exaggeration | all of us

Surely there must be times |







देवगढ, जिला ललितपुर (उत्तर प्रदेश) में ललितपुर से ३२
किमी की दूरी पर
बेतवा नदी के दायें किनारे हरी -
भरी सुरम्य घाटियों के मध्य स्थित है |


 प्राकृतिक रूप से
जितना यह स्थान सुंदर है, इसे और अधिक सुंदर बनाने का श्रेय
यहाँ की समृद्ध कला को जाता है | 


यह स्थान ७
वी शताब्दी से लेकर 1७
वी शताब्दी तक मूर्तिकला और निर्माण
कला का मुख्य केंद्र रहा |


 वैसे ही जैसे नालंदा शिक्षा के
लिए प्रसिद्द था, देवगढ कला का (विशेषतया मूर्ती निर्माण
कला और स्थापत्य कला का) प्रमुख केंद्र था | 


गुप्त वंश, चंदेल वंश,
तोमर वंश, प्रतिहार वंश और चौहान वंशी राजाओं ने
भी सदैव इस स्थान
की रक्षा की और
इसकी समृधि में योगदान दिया | 

यहीं कारण है
कि हमारे पूर्वजों के कला प्रेम और कला संसार का तीर्थ
बने इस स्थान पर हमारा मन स्वयं ही श्रदा से भर
उठता है |



यहाँ का मुख्य आकर्षण देवगढ का किला है
जो पहाड़ी पर है | वहां जैन धर्मं से सम्बंधित ४१
मंदिर विद्यमान है|



पहाड़ी पर विष्णु अवतारों से सम्बद्ध कुछ गुफाये
भी है | गुप्त कालीन दशावतार मदिर देवगढ
की शान है और भारत के प्राचीन विद्यमान
मंदिरों में से एक है |


 हालाँकि यह जर्जर अवस्था में है परन्तु
इससे यहाँ की कला का महत्व कम
नहीं हो जाता
इसके अलावा संग्रहालय में कई मूर्तिया और पुरातत्व महत्व
की वस्तुए है |



जैन और हिन्दू धर्म में वर्णित देवी देवताओं में शायद
ही कोई
होगा जिसकी मूर्ती यहाँ नहीं
हो | 


मूर्ती कला में किये गए प्रयोगों के कारण इस स्थान
पर ऐसी कई मूर्तियाँ है, जो संसार में और
कहीं नहीं मिलती है | 


देवगढ
की कला पर तो कई बुद्धिजीवियों ने
अपनी रिसर्च भी की है जिनमे
कई विदेशी भी शामिल है | यहाँ का शांतिनाथ
मंदिर और दशावतार मंदिर देखकर खजुराहों के
मंदिरों की याद आ जाती है जो वस्तुतः इसके
बाद में बने थे | 


परन्तु दोनों ही स्थानों में
अपनी अपनी विशेषताए है | कई समानताये
है, कई असमानताये भी है |



खजुराहों की मूर्तिकला सांसारिक है
वही यहाँ की मूर्तिकला अध्यात्मिक और
अद्वितीय है |



नाग्शायी विष्णु, तीर्थंकर नेमिनाथ
की स्तुति करते कृष्ण और बलराम, तेईस पार्श्वनाथ,
माता त्रिशला और तेईस तीर्थंकर,
देवी अम्बिका यक्षी के रूप में बच्चे को दूध
पिलाती हुई,


चक्रेश्वरी देवी और गोमुख यक्ष
की मूर्तियाँ , तीर्थंकर आदिनाथ
की जटा युक्त प्रतिमाये, आचार्यों और
उपाध्यायों की मूर्तिया, अनूठे मानस्तंभ,
दीवारों पर
खोदी गयी मूर्तियों का संग्रह आदि कई
ऐसी मूर्तियाँ एवं रचनाये है जो मात्र
यहीं पाए गए है |


मंदिर नंबर ३० जो तीर्थंकर शांतिनाथ को समर्पित है
अत्यंत अतिशयकारी, महत्त्वपूर्ण, बड़ा और प्रसिद्ध
है |


कुल मिलाकर यदि देवगढ को देवो की भूमि कहे तो कोई
अतिशयोक्ति नहीं होगी| हम सबको एक
बार वहां ज़रूर जाना चाहिए |